‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में लालू यादव को लगा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका ठुकराई
Supreme Court ने 'लैंड फॉर जॉब' मामले में लालू यादव की FIR रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है। ट्रायल कोर्ट मेरिट पर सुनवाई करेगा, हालांकि लालू को व्यक्तिगत पेशी से छूट मिली है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सुप्रीम कोर्ट (सोर्स-आईएएनएस)
Supreme Court on Land For Job Scam Case: ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की एफआईआर रद्द करने की उनकी मांग को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि ट्रायल कोर्ट इस मामले की सुनवाई मेरिट के आधार पर जारी रखे।
जस्टिस एमएम सुंदरेश और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान लालू यादव को हर बार निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की आवश्यकता नहीं होगी। साथ ही ट्रायल कोर्ट को मामले की मेरिट पर पूरी तरह से विचार करने का अधिकार दिया गया है। गौरतलब है कि लालू यादव ने ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामले में अपने और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी।
क्या है ‘लैंड फॉर जॉब’ मामला?
यह कथित घोटाला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। आरोप है कि मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में ग्रुप-डी की भर्तियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। जांच एजेंसियों के अनुसार, ये जमीनें लालू परिवार या उनके सहयोगियों के नाम पर ट्रांसफर या उपहार के रूप में दी गई थीं, जिसके बदले नौकरी दी गई।
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लालू यादव की दलील
लालू यादव का कहना था कि इस मामले में दर्ज एफआईआर, जांच प्रक्रिया और बाद में दाखिल चार्जशीट कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हैं। उन्होंने दलील दी कि Central Bureau of Investigation (CBI) ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 17ए के तहत जरूरी पूर्व मंजूरी नहीं ली थी।
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यह केस 18 मई 2022 को दर्ज किया गया था, जिसमें लालू यादव, उनकी पत्नी, दो बेटियों, कुछ सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया। फिलहाल 77 वर्षीय लालू प्रसाद यादव और अन्य आरोपी जमानत पर बाहर हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब साफ है कि मामला ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेगा और वहीं इसकी सुनवाई जारी रहेगी।
