जस्टिस विक्रम नाथ, फोटो- सोशल मीडिया
Stray Dog Case SC: सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान अक्सर कड़े अनुशासन और गरिमामयी प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। लेकिन हाल ही में जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ के सामने एक दिलचस्प वाकया हुआ, जहां एक महिला ने अनजाने में जजों को ‘गाइज’ कह दिया। जस्टिस ने इस पर जो प्रतिक्रिया दी, उसकी अब सराहना हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों (Stray Dogs) के गंभीर मुद्दे पर सुनवाई हो रही थी। इस संवेदनशील विषय पर जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ के सामने पशु प्रेमी, पीड़ित और विशेषज्ञ अपनी-अपनी राय और पक्ष रख रहे थे। अदालत का माहौल गंभीर था क्योंकि यह मुद्दा सीधे तौर पर जन सुरक्षा से जुड़ा हुआ था।
सुनवाई के दौरान एक महिला विशेषज्ञ ने अपनी बात रखते हुए बेंच के हस्तक्षेप और इस मुद्दे पर ध्यान देने के लिए जजों का शुक्रिया अदा किया। भावुकता और अनभिज्ञता में उन्होंने जजों को संबोधित करते हुए “You Guys” (आप लोग) कह दिया। आमतौर पर अदालत की गरिमा के अनुसार, जजों को ‘मिलॉर्ड’, ‘योर लॉर्डशिप’ या ‘योर ऑनर’ कहकर संबोधित करने का तय प्रोटोकॉल है। जैसे ही महिला के मुंह से ये शब्द निकले, वहां मौजूद वकील और अधिकारी हैरान रह गए।
महिला के संबोधन पर कुछ वकीलों ने तुरंत फुसफुसाते हुए उन्हें अपनी गलती का एहसास कराया और बताया कि कोर्ट रूम में बोलने का एक खास प्रोटोकॉल होता है। अपनी चूक का एहसास होते ही महिला ने तुरंत पीठ से माफी मांगी और स्पष्ट किया कि उन्हें इस तकनीकी नियम की जानकारी नहीं थी। यहां जस्टिस विक्रम नाथ ने एक मिसाल पेश की। उन्होंने स्थिति को बहुत ही सहजता से संभालते हुए महिला को सांत्वना दी और कहा, “कोई बात नहीं, यह ठीक है”। उन्होंने औपचारिकताओं में उलझने के बजाय सीधे मुद्दे पर चर्चा जारी रखी।
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सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के इस मानवीय व्यवहार की काफी चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टिस विक्रम नाथ ने यह साबित कर दिया कि न्याय की प्रक्रिया में शब्दों की तकनीकी बारीकियों और पुराने प्रोटोकॉल से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण आम आदमी की बात को सुनना और समझना है,। उनकी इस दरियादिली ने दिखाया कि न्यायपालिका अब अधिक सुलभ और संवेदनशील हो रही है, जहां किसी की अनभिज्ञता को दंड के बजाय समझदारी से संभाला जाता है।