‘भारत खुद को हिंदू राज्य घोषित नहीं कर सकता, हिंदू शब्द का कोई विशेष अर्थ नही; सुप्रीम कोर्ट जज का बड़ा बयान
Justice N Kotishwar Singh statement: जस्टिस कोटिश्वर सिंह ने यह भी स्वीकारा कि आधुनिक संस्थानों को आकार देने में पश्चिमी प्रभाव की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। मैं स्वयं उसी की उपज हूं
- Written By: अमन मौर्या
जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Supreme Court Judge on Hindu Term: सुप्रीम कोर्ट के जज एन. कोटिश्वर सिंह ने रविवार को नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी स्टूडेंट बार एसोसिएशन लॉ कॉन्क्लेव 2026 के कार्यक्रम के दौरान बोल रहे थे। उन्होनें भारतीय संवैधानिक ढांचे पर बड़ी टिप्पणी की है। उनका कहना है कि देश का संविधान देश को एक धार्मिक राज्य की इजाजत नहीं देता। साथ ही उन्होंने ‘हिंदू’ शब्द पर भी बयान दिया। उनके अनुसार, हिंदू शब्द ऐतिहासिक तौर पर सिंधु नदी के पार रहने वाले लोगों के लिए प्रयोग किया गया था। प्रमुख कानूनी समाचार वेबसाइट बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह ने कहा, कि भारत के जैसे सभी धर्मों को मानने वाले देश बहुत कम हैं।
भारत कभी भी हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं हो सकता। हिंदू शब्द विदेशियों सिंधू नदी के उस पार रहने वाले लोगों के इस्तेमाल किया गया था। कुछ लोग मेरे बयान से असहमत हो सकते हैं, लेकिन वास्तव में हिंदू शब्द का कोई विशेष अर्थ नहीं है। आपको बता दें कि बार एंड बेंच देश की एक प्रमुख वेबसाइट है, जो कानूनी समाचार से संबंधित खबरें पब्लिश करती है। यह सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के साथ-साथ अन्य कानूनी जगत की खबरें देती है।
‘यह एक ऐतिहासिक दस्तावेज है’
जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी स्टूडेंट बार एसोसिएशन लॉ कॉन्क्लेव 2026 के कार्यक्रम के दौरान बोल रहे थे। इस दौरान उन्होनें देश के संविधान पर बात करते हुए कहा कि, हमारे सामने संविधान है, जो सबसे रचनात्मक कानूनी दस्तावेज है। यह केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक ऐतिहासिक दस्तावेज भी है, यह एक सामाजिक दस्तावेज है, यह एक रचनात्मक दस्तावेज है।
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‘मैं पश्चिमी शिक्षा की उपज’
इस दौरान उन्होनें यह भी कहा कि उन्हें पश्चिम शिक्षा से कोई आपत्ति नहीं है। जस्टिस कोटिश्वर सिंह ने यह भी स्वीकारा कि आधुनिक संस्थानों को आकार देने में पश्चिमी प्रभाव की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने यह बताया कि पश्चिमी शिक्षा से मुझे कोई आपत्ति नहीं है मैं स्वयं उसी की उपज हूं, लेकिन अब समय आ गया है कि हम उससे आगे बढ़ें, क्योंकि शायद पश्चिम कानूनी शिक्षा प्रणाली भारत की समकालीन स्थितियों से निपटने में सक्षम नहीं है।
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इस दौरान उन्होनें इस बात पर जोर दिया कि अदालतों में क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ाया जाना चाहिए, इससे जनता की न्याय तक पहुंच और व्यवस्था में विश्वास बढ़ेगा।
