केंद्र सरकार सबसे बड़ा मुकदमेबाज, आखिर मोदी सरकार पर क्यों भड़का सुप्रीम कोर्ट? ठोक दिया ₹25 हजार का जुर्माना
Supreme Court: सर्वोच्च न्यायालय ने अनावश्यक मुकदमेबाजी पर केंद्र सरकार पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया और CISF अधिकारी की बर्खास्तगी रद्द करने के हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
- Written By: सजल रघुवंशी
सुप्रीम कोर्ट(सोर्स- सोशल मीडिया)
Supreme Court Angry On Central Government: अनावश्यक मुकदमेबाजी को लेकर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। यह आदेश केंद्र की उस याचिका पर आया, जिसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने एक सीआईएसएफ अधिकारी की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया था।
उच्च न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखते हुए न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और उच्जल भुइयां की पीठ ने सजा को असंगत माना और संबंधित अधिकारी को बकाया वेतन देने का भी आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस बी.वी नागरत्ना ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि उसने हाई कोर्ट की खंडपीठ के आदेश को चुनौती क्यों दी। उन्होंने लंबित मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि सबसे बड़ा मुकदमेबाज खुद सरकार ही है और ऐसे मामलों में हर्जाना लगाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब हाई कोर्ट किसी आदेश को अनुचित ठहराकर राहत दे चुका है, तो हर मामले में सुप्रीम कोर्ट आने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
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अदालत ने मुद्दे को गंभीरता से लिया- जस्टिस नागरत्ना
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि संबंधित अधिकारी ने मेडिकल लीव ली थी और इस दौरान उसे परिवार में एक अप्रिय घटना का भी सामना करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के एक हालिया सम्मेलन का जिक्र करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अदालत ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रही बल्कि ठोस तैयारी और विचार-विमर्श किया गया। मामले में सीआईएसएफ अधिकारी पर दो आरोप लगाए गए थे पहला, 11 दिनों तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का और दूसरा, एक महिला (जो एक सीआईएसएफ कांस्टेबल की बेटी थी) के साथ मिलकर मुंबई से भागने तथा अपने छोटे भाई की शादी में शामिल होने की साजिश रचने का, जिसे अनुशासनहीनता माना गया।
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मेडिकल लीव पर थे अधिकारी
उच्च न्यायालय ने माना कि 11 दिनों की अनुपस्थिति के दौरान अधिकारी स्वीकृत चिकित्सा अवकाश पर थे। अदालत ने यह भी कहा कि दूसरे आरोप महिला के साथ भागने के मामले में सुनवाई के दौरान संबंधित महिला स्वयं उपस्थित हुई और उसने स्पष्ट किया कि उसे अधिकारी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है। अदालत ने आगे कहा कि यह निर्विवाद तथ्य है कि याचिकाकर्ता के भाई ने उस महिला से विवाह किया था। ऐसे में यह निष्कर्ष निकाला गया कि अधिकारी की ओर से कोई ऐसा कदाचार नहीं हुआ था जिसके आधार पर उसे सेवा से बर्खास्त किया जा सके।
