जब तक परिभाषा तय नहीं, एक इंच जमीन पर भी नहीं होगा खनन, अरावली मामले पर चला सुप्रीम कोर्ट का हथौड़ा
CJI Suryakant Aravalli Order: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि जब तक अरावली की नई परिभाषा तय नहीं होती तब तक खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
सुप्रीम कोर्ट (डिजाइन फोटो), सोर्स- नवभारत
Supreme Court Aravalli Mining Ban: देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला अरावली को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा संदेश दिया है। शुक्रवार, 15 मई को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैली अरावली पहाड़ियों के किसी भी हिस्से का इस्तेमाल खनन के लिए तब तक नहीं होगा, जब तक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति इसकी सीमाओं और परिभाषा को फिर से स्पष्ट नहीं कर देती।
पीठ ने स्वतः संज्ञान लिए गए इस मामले में अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा से संबंधित मुद्दों पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां जो कुछ भी हो रहा है, उसे लेकर मिल रही प्रतिक्रियाएं काफी चिंताजनक हैं।
टुकड़ों में नहीं होगी सुनवाई: कोर्ट
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कहा कि वे इस मुद्दे की टुकड़ों में सुनवाई नहीं करेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक वे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाते, तब तक अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह की गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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खनन पट्टा धारकों को फिलहाल कोई राहत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई भी आदेश पारित नहीं किया जाएगा। पीठ ने कहा कि यह एक संवेदनशील मामला है और इसमें जल्दबाजी करना सही नहीं होगा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि यदि किसी का खनन पट्टा रद्द किया जाता है, तो संबंधित पक्ष उसे कानूनी रूप से चुनौती देने के लिए स्वतंत्र है। इससे पहले, 20 नवंबर 2025 को कोर्ट ने अरावली के दायरे में आने वाले चार राज्यों में नए खनन पट्टे देने पर पहले ही रोक लगा दी थी।
क्या है ‘100 मीटर’ की परिभाषा का विवाद?
अरावली की सुरक्षा के लिए मंत्रालय की एक समिति ने सिफारिश की थी कि जिस भू-आकृति की ऊंचाई स्थानीय भू-स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक हो, उसे ‘अरावली पहाड़ी‘ माना जाए। साथ ही, 500 मीटर के भीतर स्थित ऐसी दो या अधिक पहाड़ियों के समूह को ‘अरावली पर्वतमाला’ की श्रेणी में रखा गया था।
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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस परिभाषा पर उठे विरोध और गंभीर अस्पष्टताओं का संज्ञान लेते हुए पिछले साल दिसंबर में अपने पुराने आदेश को स्थगित कर दिया था। कोर्ट को यह अंदेशा है कि 100 मीटर की ऊंचाई और 500 मीटर की दूरी का यह मानदंड कहीं पर्वतमाला के एक बड़े हिस्से को पर्यावरणीय संरक्षण से वंचित न कर दे।
