सोनिया गांधी, मल्लिकार्जु खरगे (फोटो- सोशल मीडिया)
नई दिल्लीः भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के 7 दिन हो गए हैं। राष्ट्रीय शोक के अंतिम दिन उनकी स्मृति में डॉ. सिंह के निज निवास पर अखंड पाठ रखा गया था। इस अखंड पाठ में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और CCP चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने अंखड पाठ में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
सोनिया और खड़गे ने मनमोहन सिंह के घर पहुंचकर सबसे पहले उन्हें श्रद्धांजलि दी। फिर परिवार से मुलाकात की। इस दौरान कांग्रेस के अन्य बड़े नेता भी मौजूद थे।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह 2004 से लेकर 2014 तक प्रधानमंत्री रहे थे। उनका 92 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के चलते का 26 दिसंबर की रात निधन हो गया था। घर पर अचानक बेहोश होने के बाद उन्हें रात को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां उनका रात को 9.51 मिनट पर निधन हो गया। उनके निधन के बाद 7 दिन का राष्ट्रीय़ शोक घोषित किया गया था। जिसका आज अंतिम दिन है।
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जब डॉ मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तो उस समय सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थी। दोनों बार सोनिया गांधी की लीडरशिप में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए की केंद्र में बनी थी। इस दौरान सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह की जोड़ी ने 10 साल तक सफलता पूर्वक सरकार चलाई थी।
उन्होंने कहा कि उनके शुद्ध हृदय और उत्कृष्ट दिमाग के कारण उन्हें भारत के लोग बहुत प्यार करते थे। सोनिया गांधी के अनुसार, ‘‘मनमोहन सिंह के परामर्श, बुद्धिमत्तापूर्ण सलाह और विचारों की हमारे देश के राजनीतिक क्षेत्र में उत्सुकता से मांग की जाती थी और उन्हें गहराई से महत्व दिया जाता था। दुनिया भर के नेताओं और विद्वानों द्वारा उनका सम्मान और प्रशंसा की गई, उन्हें अपार ज्ञान और कद के राजनेता के रूप में सराहा गया।” सोनिया ने कहा कि मनमोहन सिंह ने उनके द्वारा संभाले गए प्रत्येक उच्च पद पर प्रतिभा और विशिष्टता लाई और उन्होंने भारत को गौरव और सम्मान दिलाया।
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मेरे लिए डॉ. मनमोहन सिंह का निधन एक बड़ी व्यक्तिगत क्षति है। वह मेरे मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक थे। वह अपने व्यवहार में बहुत सौम्य थे, लेकिन अपने गहरे विश्वासों में बहुत दृढ़ थे।” उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता गहरी और अटूट थी। सोनिया गांधी ने इस बात का उल्लेख किया, ‘‘उनके साथ कोई भी समय बिताने का मतलब उनके ज्ञान और दूरदर्शिता से प्रबुद्ध होना, उनकी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से प्रभावित होना और उनकी वास्तविक विनम्रता से आश्चर्यचकित होना था।”