कॉकरोच आंदोलन पर सोनम वांगचुक का समर्थन, सरकार को चेताया, बोले- असहमति दबाने से बढ़ेगा गुस्सा
Cockroach Janata Party: सोनम वांगचुक ने ‘कॉकरोच’ आंदोलन का समर्थन करते हुए युवाओं की डिजिटल अभिव्यक्ति का सम्मान करने और असहमति को दबाने से बचने की अपील की।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सोनम वांगचुक(Image- Social Media)
Sonam Wangchuk on Cockroach Janata Party: पर्यावरणविद् और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने शनिवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में चल रहे ऑनलाइन ‘कॉकरोच’ आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। सोनम ने खुद को ‘मानद कॉकरोच’ बताते हुए सरकार से अपील की कि वो युवाओं की ‘डिजिटल अभिव्यक्ति’ को दबाने की जगह उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर ध्यान दे। इस ऑनलाइन कैंपेन में व्यंग्य के तौर तथा दृढ़ता एवं असहमति के प्रतीक के तौर पर कॉकरोच की तस्वीर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बता दें कि इस अभियान ने हाल के दिनों में लोगों का ध्यान तब आकर्षित किया, जब इसके संस्थापकों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कार्रवाई की शिकायत की है, इसमें अकाउंट सस्पेंड और हैकिंग के आरोप भी शामिल हैं। कॉकरोच पार्टी का यह आंदोलन बेरोजगारी, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और सार्वजनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर हो रहा है।
मैं बहुत प्रभावित हूं: वांगचुक
सोनम वांगचुक ने एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए इस विवाद पर कहा कि इस अभियान को लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि खतरे के रूप में। सोनम ने कहा, ”सबसे पहले तो, मैं बहुत प्रभावित हूं।” उन्होंने आगे कहा, ”हमारे युवाओं की ऐसी रचनात्मक अभिव्यक्ति चिंता या भय की कोई बात नहीं है। सरकार को यह संदेश समझना चाहिए- संदेशवाहक को मत मारो। अगर हम संदेशवाहक को मार देंगे, तो संदेश खत्म नहीं होगा।”
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जब सोनम वांगचुक से पूछा गया कि क्या वो औपचारिक रूप से इस आंदोलन में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा, ”मुझे कई जगहों से इस पर बोलने के लिए कहा गया है। कुछ लोग कह रहे हैं कि मुझे भी सदस्य बन जाना चाहिए।” उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, ”(लेकिन) मुझे लगता है कि मैं इसके योग्य नहीं हूं- मैं न तो बेरोजगार हूं और न ही आलसी। इसलिए, दुख की बात है कि मैं सदस्य नहीं हूं। लेकिन मैं खुद को मानद कॉकरोच मानता हूं।”
संदेश को समझना भारत सरकार का कर्तव्य
वांगचुक ने कहा, ”जिस तरह आप अखबारों में कार्टून बनाने वालों को इसलिए गोली नहीं मार देते क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या रक्षा मंत्री का व्यंग्यचित्र बनाया है। उसी तरह, यह भी व्यंग्य है। इसे प्रतिक्रिया के रूप में देखें।” सोनम वांगचुक ने आगे कहा, मैं इस बात से बहुत प्रभावित हूं कि भारत के युवाओं ने अपनी निराशा को इतने रचनात्मक तरीके से व्यक्त करना चाहा, न कि सड़कों पर पत्थर फेंककर, जैसा कि अन्य देशों में पहले हो चुका है। इसका सम्मान करना, इसे स्नेहपूर्वक देखना और इसके संदेश को समझना भारत सरकार का कर्तव्य है।
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हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि ऑनलाइन मंचों को दबाने से युवाओं में असंतोष और बढ़ सकता है। आंदोलन से जुड़े सोशल मीडिया खातों को बंद किए जाने की खबरों का हवाला देते हुए वांगचुक ने कहा कि प्रशासन को असहमति को दबाने से बचना चाहिए।
