सीमा कुमारी
नई दिल्ली: भारत देश 15 अगस्त, 2023 को अपना 77वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। अपना राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए, राष्ट्रीय गीत गाकर पूरा देश न सिर्फ आज़ादी का जश्न मनाएगा बल्कि अपने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को भी नमन करेगा। बच्चे एवं बुज़ुर्ग, सभी उन बहादुरों का सम्मान करेंगे जिन्होंने स्वयं की आहूति देकर 200 वर्षों के ब्रिटिश शासन से हिन्दुस्तान को स्वतंत्रता दिलाई थी।
भारत देश को आजाद हुए 76 साल पूरे हो गए हैं। इन 76 वर्षों में देश ने दुनिया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए खूब संघर्ष किया। बड़ी से बड़ी मुश्किलों का सामना किया। आज पूरी दुनिया गर्व से हिंदुस्तान का नाम लेती है। ये सब संभव हो पाया है देश के एक-एक नागरिकों की वजह से।
इतिहासकारों के अनुसार, इन 76 सालों में भारतीयों ने खूब परेशानियों को झेला। इसकी शुरुआत भारत-पाकिस्तान के बंटवारे से हुई और आज तक कुछ न कुछ कठिनाई लगी रहती है। आइए जानें उन घटनाओं के बारे में, जो आज भी हम भारतवासियों के दिलो दिमाग में बसी हुई है।
भारत इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक विभाजन की त्रासदी है। ब्रिटिश शासन ने देश को स्वतंत्रता देने से पहले भारत का सांप्रदायिक आधार पर बंटवारा किया। भारत से अलग होकर पाकिस्तान अलग देश बन गया।
भारत इतिहास की दूसरी महत्वपूर्ण घटनाओं में चीन-भारत युद्ध (1962) का होना। इतिहासकारों की मानें तो, यह युद्ध भारत-चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर युद्ध हुआ। चीन ने मैकमोहन रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। एक महीने बाद चीन ने युद्ध विराम की घोषणा की। इस जंग में भारत का काफी नुकसान हुआ।
जानकारों के अनुसार, अभी देश चीन के साथ हुए युद्ध से उबरा नहीं था कि अचानक से पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया। इस युद्ध में दोनों पक्ष को भारी नुकसान हुआ, आखिरकार जीत भारत की हुई। आजादी के बाद यह पाकिस्तान के खिलाफ मिली दूसरी जीत थी।
एक आजाद राष्ट्र के रूप में बांग्लादेश का उदय दिसंबर 1971 में हुआ था लेकिन इसकी नींव इससे पहले ही रखी जा चुकी थी। बांग्लादेश को आजाद कराने में भारत की भूमिका को कभी नकारा नहीं जा सकता है।
जानकारों के मुताबिक, पूर्वी पाकिस्तानियों ने पाकिस्तान से आजादी के लिए लड़ाई लड़ी और भारत ने उनका साथ दिया। इस पर बौखलाए पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया। भारत ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए। तब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। 26 मार्च 1971 को शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश एक स्वतंत्र देश बन गया।
18 मार्च 1974 को बिहार में छात्रों ने कुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ यह आंदोलन शुरू किया। इसका नेतृत्व समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण ने किया था। देखते-देखते यह आंदोलन पूरे देश भर में फैल गया। लोगों के मन में इंदिरा गांधी सरकार के प्रति गुस्सा था। जेपी ने इंदिरा गांधी के खिलाफ आवाज उठाई। यह आंदोलन बाद में जेपी आंदोलन के नाम से जाना गया।
यह भारत के इतिहास की सबसे भयानक घटनाओं में दर्ज है। इंदिरा गांधी की हत्या के एक दिन बाद एक नवंबर 1984 को देशभर में सिख विरोधी दंगे भड़क गए। नरसंहार में करीब 15 हजार निर्दोष लोगों को मार दिया गया। राजधानी दिल्ली के भी ज्यादातर इलाकों में हत्या और लूटपाट की घटनाएं हुईं। निर्दोष लोगों की दुकानें, घर और गुरुद्वारे लूट लिए गए।
अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया। 16वीं सदी में अयोध्या में बनी मस्जिद को कारसेवकों ने ढहा दिया। इस मामले में फैजाबाद में दो एफआईआर दर्ज हुई। भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती समेत लाखों कारसेवकों के खिलाफ केस दर्ज हुआ।
बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने के लिए दाऊद इब्राहिम ने मुंबई में बम धमाकों की साजिश रची। पूरी योजना के साथ मुंबई के 13 अलग-अलग स्थानों पर धमाके किए गए। इन धमाकों में 257 लोग मारे गए, जबकि 700 बुरी तरह घायल हो गए। 19 नवंबर 1993 में यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा गया। इन धमाकों के मास्टरमाइंड अबू सलेम समेत अन्य कई दोषियों को विशेष टाडा अदालत ने सजा भी सुना दी है।
कश्मीर मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान के बीच यह युद्ध हुआ। शुरुआत पाकिस्तान ने की। तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ ने कारगिल युद्ध को अंजाम दिया। यह जंग कारगिल की पहाड़ियों पर लड़ी गई। एलओसी के अंदर पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन विजय’ शुरू किया। जुलाई में युद्ध समाप्त हो गया। भारत ने टाइगर हिल पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया।
13 दिसंबर को संसद भवन पर आत्मघाती हमला हुआ। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने हमला किया। सफेद एंबेसडर से पांच आतंकी संसद परिसर में घुसे। वे 45 मिनट तक गोलियां बरसाते रहे। इस हमले से पूरा संसद दहल उठा। दिल्ली पुलिस के जवान समेत कुल नौ लोग शहीद हुए। आखिरकार सुरक्षाकर्मियों ने आतंकियों को मार गिराया।
अयोध्या से ट्रेन में सवार होकर गोधरा लौट रहे 59 हिंदू तीर्थयात्रियों के रेल डिब्बे को दंगाइयों ने आग लगा दी। इसके बाद गुजरात में हिंसा भड़क गई। तीन दिनों तक चली हिंसा में एक हजार से ज्यादा लोग मारे गए।
26 नवंबर को मुंबई पर आतंकवादी हमला हुआ। पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने यह हमला किया। 10 आतंकी कराची से समुद्र के रास्ते मुंबई में आए थे। इस आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए। 300 से ज्यादा लोग हमले में घायल हुए थे। सुरक्षा बल, आतंकवादियों से तीन दिनों तक जूझते रहे। 29 नवंबर की सुबह तक नौ हमलावरों का सफाया हुआ। आतंकी मोहम्मद अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया।
2020 को कोरोना महामारी के कारण याद किया जाएगा। इस महामारी ने देश के लाखों लोगों को संक्रमित कर दिया। संक्रमण से अब तक लाखों लोगों की जान चली गई है। देश ने कोरोना की तीन लहर का सामना किया। इसने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को हिला कर रख दिया।
26 दिसंबर को हिंद महासागर में समुद्र के नीचे भूकंप आने से विशाल सुनामी आई। इससे भारत में 16,279 लोगों की जानें चली गई। भारत में इसका सबसे ज्यादा असर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार में देखा गया।
28-29 सितंबर की रात भारतीय सेना के विशेष बलों के 150 कमांडोज की मदद से सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन किया गया। भारतीय सेना आधी रात पीओके में 3 किलोमीटर अंदर घुसे और आतंकियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। 28 सितंबर की आधी रात 12 बजे MI 17 हेलिकॉप्टरों के जरिए 150 कमांडो को एलओसी के पास उतारा गया था।
जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 और 35-A द्वारा दिए गए विशेष दर्जे को हटाने के लिए संसद ने 5 अगस्त, 2019 को मंजूरी दी। तब केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे – ‘ऐतिहासिक भूल को ठीक करने वाला ऐतिहासिक कदम’ कहा था। बढ़ रहा है। चाइल्ड मैरिज एक्ट, शिक्षा का अधिकार और भूमि सुधार जैसे कानून अब यहां भी प्रभावी है।
9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने एक लंबी सुनवाई के बाद अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाया था। 100 सालों से ज्यादा समय से चले रहे इस विवाद को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में संवैधानिक पीठ ने इस पर फैसला सुनाया कि विवादित जमीन पर हक हिंदुओं का है।
1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में भारत ने परमाणु परीक्षण किया था। इस फैसले से पूरी दुनिया चकित रह गई थी। 11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में तीन बमों के सफल परीक्षण के साथ भारत न्यूक्लियर स्टेट बन गया। ये देश के लिए गर्व का पल था। जवाब मिलेगा अटल बिहारी वाजपेयी. हालांकि 19 मार्च 1998 को दूसरी बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए अटल बिहारी वाजपेई को कई क्षेत्रीय पार्टियों से समझौते करने पड़े थे। इसलिए भारत को परमाणु राष्ट्र बनाना इतना आसान नहीं था।