‘पश्चिम एशिया के हालात चिंताजनक, युद्ध पर PM मोदी की पैनी नजर’, मिडिल-ईस्ट पर जयशंकर का राज्यसभा में बयान
S Jaishankar on Iran War: सरकारी की तरफ से एस जयशंकर ने कहा कि 28 फरवरी को जंग की शुरूआत हुई। सरकार वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. कूटनीति से ही समस्या का समाधान निकलेगा।
- Written By: अर्पित शुक्ला
मिडिल-ईस्ट पर संसद में बयान देते विदेश मंत्री जयशंकर (Image- Screen Capture/sansadtv)
Israel Iran War: पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर सरकार ने संसद में बयान दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी। उन्होंने कहा कि सरकार वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जयशंकर ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा संकट का समाधान केवल कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है और भारत इसी दिशा में प्रयास कर रहा है।
“The Prime Minister continues to closely monitor the emerging developments, and relevant ministries are coordinating to ensure effective responses,” says EAM Dr S Jaishankar as he makes a statement in the Rajya Sabha on the situation in West Asia. https://t.co/AXC9nujGpk pic.twitter.com/dDLt9S92QH — ANI (@ANI) March 9, 2026
पश्चिम एशिया की स्थिति पर राज्यसभा में बयान देते हुए EAM डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “प्रधानमंत्री नए डेवलपमेंट पर करीब से नज़र रख रहे हैं, और संबंधित मंत्रालय असरदार जवाब देने के लिए कोऑर्डिनेट कर रहे हैं।”
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सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील
उन्होंने आगे कहा, “हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी करके गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। हमारा मानना है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।”
वहीं पश्चिम एशिया की स्थिति पर राज्यसभा में जब विदेश मंत्री अपना बयान दे रहे थे, उसी दौरान विपक्षी सांसदों ने शोर-शराबा शुरू कर दिया। इसके बीच ही जयशंकर ने सदन में सरकार का पक्ष रखा और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर भारत की चिंता जाहिर की।
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भारत के लिए चिंता की बात
एस जयशंकर ने कहा, “यह चल रहा झगड़ा भारत के लिए खास चिंता की बात है। हम पड़ोसी इलाका हैं, और वेस्ट एशिया में स्थिरता बनाए रखना हमारी ज़िम्मेदारी है। खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। ईरान में भी, कुछ हज़ार भारतीय पढ़ाई या नौकरी के लिए हैं। यह इलाका हमारी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बहुत ज़रूरी है और इसमें तेल और गैस के कई ज़रूरी सप्लायर शामिल हैं, सप्लाई चेन में गंभीर रुकावटें और अस्थिरता का माहौल गंभीर मुद्दे हैं।”
