विदेश मंत्री जयशंकर का मानवाधिकारों पर बड़ा बयान, आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की अपील

Global Rights Mandate: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मानवाधिकारों पर व्यापक दृष्टिकोण अपनाने, आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की वकालत करने और तकनीक को मानवाधिकारों के लिए मददगार बनाने पर जोर दिया है।
EAM Jaishankar Calls for Unified Human Rights Approach and Zero Tolerance for Terrorism
विदेश मंत्री एस. जयशंकर (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Global Human Rights Development Vision: जिनेवा में आयोजित मानवाधिकार परिषद की बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने मानवाधिकारों को केवल बहस का विषय न मानकर इसे विकास और क्षमता निर्माण से जोड़ने की अपील की। भारत ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकारों का असली उद्देश्य सबसे कमजोर वर्ग के जीवन में सुधार लाना होना चाहिए। इस संबोधन में आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता और डिजिटल तकनीक के सही उपयोग पर भी जोर दिया गया।

व्यापक नजरिया

डॉ. जयशंकर ने मानवाधिकारों के लिए एक ऐसे नजरिए का आह्वान किया जो राजनीतिकरण और दोहरे मापदंडों से पूरी तरह मुक्त हो। उन्होंने टकराव के बजाय संवाद और बंटवारे के बजाय आम सहमति बनाने पर विशेष जोर देते हुए अपनी बात रखी। उनका मानना है कि मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका वास्तविक साझेदारी और क्षमता-निर्माण ही है।

आतंकवाद पर प्रहार

विदेश मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संयुक्त राष्ट्र को आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद को मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन बताया क्योंकि यह बेगुनाह लोगों की कीमती जिंदगी को निशाना बनाता है। किसी भी स्थिति में आतंकी कृत्य का कोई औचित्य नहीं हो सकता और इसका सामूहिक सामना करना अनिवार्य है।

भारत की भूमिका

भारत को मानवाधिकार परिषद में सातवीं बार भारी बहुमत के साथ चुना गया है जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भरोसे को दर्शाता है। जनरल असेंबली में पड़े कुल 188 वोटों में से भारत को 177 वोट मिले जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। भारत अब परिषद में एक मजबूत 'सेतु निर्माता' के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध और तैयार है।

तकनीक और विकास

तकनीक के उपयोग पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने कहा कि इसे मानवाधिकारों के लिए एक 'फोर्स मल्टीप्लायर' की तरह होना चाहिए। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने करोड़ों लोगों को पारदर्शिता के साथ सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित कराया है। भारत अब अपने इस सफल अनुभव और जानकारी को दुनिया भर की जनता की भलाई के लिए स्वेच्छा से साझा कर रहा है।

वैश्विक चुनौतियां

उन्होंने पश्चिमी संस्थाओं के चयनात्मक दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी समूह का अलग-थलग होना अधिकारों को कमजोर करता है। वैश्विक महामारी, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक तनाव ने दुनिया भर में पहले से मौजूद पुरानी असमानताओं को और अधिक बढ़ा दिया है। भारत ने गरीबी और बाहरी झटकों के बावजूद हमेशा लोकतंत्र, बहुलवाद और सामाजिक न्याय के रास्ते को ही प्राथमिकता दी है।

साझा उम्मीदें

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ के देशों की उम्मीदों और उनके भरोसे को अपनी प्राथमिकता बताया है। उनका मानना है कि असुरक्षा की भावना समाज के सभी वर्गों की भलाई के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकती है। इसलिए भारत साझा हितों के लिए दुनिया के सभी देशों के साथ मिलकर सार्थक काम करने का इच्छुक है।

मानवीय क्षमता

उन्होंने बताया कि भारत मानवीय क्षमता को बड़े पैमाने पर विकसित करने के लिए लगातार निवेश कर रहा है ताकि सबको लाभ मिले। डिजिटल माध्यमों से वित्तीय सेवाओं और सार्वजनिक योजनाओं तक पहुंच आसान हुई है जिससे भ्रष्टाचार और लीकेज में भारी कमी आई है। यह मॉडल दुनिया के अन्य विकासशील देशों के लिए भी मानवाधिकारों को सुरक्षित करने का एक बेहतरीन उदाहरण हो सकता है।

ठोस सुधार

विदेश मंत्री ने मानवाधिकारों को बहस के संकुचित दायरे से बाहर निकालकर इसे आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ा है। उन्होंने दुनिया से अपील की है कि वे छोटे हितों के बजाय मानवीय विकास और कल्याण पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करें। संघर्ष और अनिश्चितता के इस दौर में भारत शांति और सहयोग का संदेश लेकर वैश्विक मंच पर खड़ा है।

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