योगी आदित्यनाथ व अविमुक्तेश्वरानंद (सोर्स- सोशल मीडिया)
Shankaracharya Avimukteshwaranand on Yogi Govt: उत्तर प्रदेश का बस्ती जनपद एक बार फिर से राजनैतिक अखाड़ा बन गया है, आज ब्राह्मण समाज को एकजुट करने के लिए पूर्वांचल के बाहुबली ब्राह्मण नेता एकसाथ मंच पर पहुंचे और योगी सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। इस कार्यक्रम का नाम ‘सनातन संवाद’ दिया गया, जिसका नेतृत्व जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने किया। कार्यक्रम के दौरान शंंकराचार्य ने योगी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए सनातनियों को एक होकर आने वाले चुनाव में वोट करने की अपील की है।
बस्ती का जीआईसी मैदान आज एक बार फिर से इतिहास बना दिया, जहां से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। इतना ही नहीं इस मंच से योगी आदित्यनाथ के धुर विरोधी पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने खुलेमंच से आह्वान किया कि ब्राह्मण अब एकजुट हो जाए और अहंकारी व अधर्मी सनातन विरोधी सरकार के खिलाफ फरसा उठा कर सत्ता से इस बार उखाड़ फेंके।
वहीं, पीसीएस अधिकारी रहे अलंकार अग्निहोत्री ने भी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि ब्राह्मण जरूरत पड़ने पर फरसा भी उठा सकता है और अब ब्राह्मण सुदामा नहीं परशुराम है, अलंकार ने हर घर फरसा घर घर फरसा का नारा देकर ब्राह्मणों में जोश भरने का भी काम किया। वही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऊपर काफी गंभीर आरोप लगाए।
शंकराचार्य ने कहा कि अगर वर्तमान बीजेपी सरकार गाय और सनातन की बात करती तो विपक्ष को मौका नहीं मिलता। वहीं गाय को राष्ट्र माता घोषित करने के मुद्दे पर शंकराचार्य ने कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव जब तक पार्टी स्तर गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की घोषणा नहीं कर देते तब वे उनके साथ भी नहीं हैं।
शंकराचार्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 16 करोड़ पशुओं को मारकर खा लिया गया, और यूपी सरकार इस पर रोक नहीं लगा सकी। कहा कि पहले के मुख्यमंत्री अगर गायों के मांस की बिक्री पर रोक नहीं लगाए तो इस बार योगी सरकार ने भी उस पर क्यों रोक नहीं लगाया, इसका मतलब इनकी इच्छा ही नहीं है कि गाय को कटने से रोका जाए।
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वहीं, योगी आदित्यनाथ पर सवाल खड़ा करते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि एक व्यक्ति दो पद कैसे संभाल सकता है। जब योगी आदित्यनाथ संत है तो फिर कैसे उत्तर प्रदेश सरकार से वेतन लेकर इस पद का निर्वहन कर रहे है। उन्हें चाहिए दोनों में से एक पद को छोड़ दे मगर वे ऐसा नहीं कर रहे और खुद को योगी सन्यासी कहकर दोनों पद लेकर चल रहे जो मर्यादा के अनुकूल नहीं है।