CM योगी आदित्यनाथ को लेकर क्या बोले हरीश राणा के पिता? कही यह बड़ी बात

Harish Rana Father Statement: हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट और सीएम योगी का आभार जताया, साथ ही उन्होंने बताया कि दुखद घड़ी में उनके पड़ोसियों ने उनकी काफी मदद की।
Harish Rana Father Statement
हरीश राणा के पिता (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Harish Rana Death: परमानेंट वेजिटेटिव सेटट में 13 साल तक संघर्ष करने वाले हरीश राणा ने दिल्ली एम्स में 24 मार्च को आखिरी सांस ली। हरीश के पिता अशोक राणा ने इस दुखद घड़ी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सर्वोच्च न्यायालय के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। 2013 में पढ़ाई के दौरान उनके साथ हादसा हुआ था। जिसकी वजह से वह 13 साल तक कौमा में थे।

उनकी हालत को देखते हुए उनके माता-पिता ने कानूनी लड़ाई लड़ी जिसके चलते ही उन्हें इच्छा मृत्यु की परमिशन दी गई। हरीश के पिता अशोक राणा ने भावुक होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद किया, जिन्होंने जिलाधिकारी, जीडीए वीसी और कमिश्नर को उनके घर भेजकर सहायता का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जताया आभार

अशोर राणा ने भावुक होकर सीएम योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी, जीडीए वीसी और कमिश्नर को उनके घर भेजकर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। सरकार की ओर से परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की गई है। राणा ने जस्टिस परदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा के मानवीय दृष्टिकोण और निर्देशों की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने एम्स की मेडिकल टीम और अपनी कानूनी टीम का भी धन्यवाद किया। जिन्होंने इस मुश्किल स्वास्थ्य और कानूनी लड़ाई में उनका साथ दिया।

पड़ोसियों को लेकर क्या कहा?

दुख की इस घड़ी में मानवीय संवेदनाओं की एक मिसाल भी देखने को मिली। अशोक राणा ने बताया कि उनकी सोसाइटी में रहने वाले अरविंद कुमार जैसे पड़ोसियों ने दिन-रात उनके मेहमानों के लिए भोजन बनाकर सेवा की। धार्मिक परंपराओं के चलते शोकग्रस्त घर में चूल्हा नहीं जलाया जा सकता था, ऐसे में पड़ोसियों ने आगे बढ़कर पूरी जिम्मेदारी संभाली और हिमाचल प्रदेश से आए परिजनों ने भी बताया कि परिवार ने रीति-रिवाजों का पालन करते हुए अब तक अन्न ग्रहण नहीं किया है।

सुप्रीम कोर्ट से मिली थी इच्छामृत्यु की अनुमति

दरअसल, हरीश राणा की लगातार बिगड़ती हालत और सुधार की कोई उम्मीद न दिखने पर परिवार ने कानूनी रास्ता अपनाया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया, यानी जीवन रक्षक उपकरण हटाने की अनुमति दे दी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि गरिमा के साथ मृत्यु भी जीवन के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह ऐतिहासिक निर्णय देश के चिकित्सा और कानूनी क्षेत्र में एक अहम मिसाल बन गया है, जो असाध्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को सम्मानजनक और शांतिपूर्ण अंत का विकल्प देता है।

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