DY चंद्रचूड़ से तुरंत खाली कराएं बंगला, SC ने केंद्र को लिखा पत्र, क्या है कहानी
सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को एक पत्र भेजा है। जिसमें कहा गया है कि पूर्व CJI को जिस समय तक सरकारी बंगले में रहने के लिए कहा गया था, वह समय सीमा पूरी हो चुकी है।
- Written By: अभिषेक सिंह
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (सोर्स- सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ पिछले साल अपने पद से रिटायर हो गए थे लेकिन उन्होंने अभी तक सरकारी आवास खाली नहीं किया है। अब उन्हें जल्द से जल्द अपना बंगला खाली करना पड़ सकता है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के एडमिन डिपार्टमेंट ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने केंद्र सरकार के अधीन आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में कहा गया है कि पूर्व सीजेआई को जिस समय तक सरकारी बंगले में रहने के लिए कहा गया था, वह समय सीमा पूरी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी मांग की है कि सरकार इस बंगले को खाली करके कोर्ट के हाउसिंग पूल को वापस करे।
डीवाई चंद्रचूड़ के बंगले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक जुलाई को पत्र भेजा था। आपको बता दें कि पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ को सरकार ने लुटियंस दिल्ली के कृष्ण मेनन मार्ग पर स्थित बंगला नंबर पांच दिया था। तब से वह यहीं रह रहे हैं। आपको बता दें कि यह बंगला आधिकारिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा सीजेआई का आवास है।
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क्या बोला SC एडमिन डिपार्टमेंट
सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक विभाग ने कहा है कि डॉ. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ से बंगला नंबर पांच बिना किसी देरी के खाली कराया जाए। इस बंगले में रहने के लिए उन्हें दी गई अनुमति की विस्तारित अवधि 21 मई 2025 को समाप्त हो चुकी है। इसके अलावा 2022 नियमावली के नियम 3बी के तहत प्रदत्त 10 मई 2025 तक की अवधि भी समाप्त हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से केंद्र सरकार को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि डीवाई चंद्रचूड़ अब नियमों के तहत आवंटित किए जा सकने वाले टाइप VII श्रेणी के बजाय टाइप VIII बंगले में रह रहे हैं, जिसकी अनुमति केवल सेवारत सीजेआई को ही है।
नियम 3बी के अनुसार कोई भी सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश छह महीने तक केवल टाइप VII आवास ही रख सकता है। चंद्रचूड़ ने दिसंबर 2024 में निवर्तमान सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना को पत्र लिखकर 30 अप्रैल 2025 तक बंगला रखने की अनुमति मांगी थी, जो उन्हें दे दी गई थी।
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इसके बाद मौखिक अनुरोध पर उन्हें 31 मई तक रहने की अनुमति दी गई, वह भी इस शर्त के साथ कि इसके बाद कोई और विस्तार नहीं दिया जाएगा। इसके बावजूद अब वे जुलाई में भी उसी बंगले में रह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय से कहा है कि अब और विस्तार नहीं दिया जा सकता, इसलिए बिना किसी देरी के बंगला वापस ले लिया जाए।
