ED के डर से जगदीप धनखड़ ने दिया था इस्तीफा, सांसद की इस किताब में खुलासा; PM मोदी को लेकर भी बड़ा दावा
Jagdeep Dhankhar: शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत का दावा है कि जगदीप धनखड़ मोदी सरकार के खिलाफ स्वतंत्र राजनीतिक कदम उठा रहे थे, जिससे सरकार असहज थी।
- Written By: मनोज आर्या
जगदीप धनखड़, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sanjay Raut On Jagdeep Dhankhar Resignation: शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत की नई पुस्तक ‘अनलाइकली पैराडाइज’ (Unlikely Paradise) के अंग्रेजी संस्करण के विमोचन के साथ ही सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। जेल प्रवास के दौरान लिखी गई इस किताब में राउत ने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कई चौंकाने वाले दावे किए हैं।
राउत ने अपनी किताब में दावा किया है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पिछले साल (2025) स्वेच्छा से नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) के भारी दबाव में आकर पद छोड़ा था। अपनी किताब में उन्होंने कई अन्य बड़े दावे किए हैं।
‘ED के दवाब में धनखड़ का इस्तीफा’
शिवसेना (यूबीटी) सांसद का दावा है कि जगदीप धनखड़ मोदी सरकार के खिलाफ स्वतंत्र राजनीतिक कदम उठा रहे थे, जिससे सरकार असहज थी। किताब के अनुसार, ऐसी अफवाहें थीं कि धनखड़ दंपत्ति ने जयपुर का अपना घर बेचकर पैसा विदेश भेजा है। इसी आधार पर जांच एजेंसियों ने एक फाइल तैयार की थी। संजय राउत का आरोप है कि ED ने इसी फाइल का डर दिखाकर उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर किया, जिसके बाद 21 जुलाई को उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
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पूर्व चुनाव आयुक्त पर भी बड़ा दावा
किताब में पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को लेकर भी गंभीर खुलासे किए गए हैं। राउत के अनुसार, लवासा ने पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के आठ उल्लंघनों पर कार्रवाई की कोशिश की थी। स्वतंत्र राय रखने के कारण उनके परिवार पर ED के छापे डलवाए गए और उन्हें समन भेजे गए। अंततः 2020 में दबाव के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और वे लगातार जांच के दायरे में रहे।
शरद पवार और PM मोदी से जुड़ा किस्सा
संजय राउत ने गुजरात दंगों के बाद के दौर का जिक्र करते हुए लिखा है कि उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जेल भेजने की तैयारी थी, लेकिन शरद पवार इसके पक्ष में नहीं थे। पवार का तर्क था कि राजनीतिक मतभेद के आधार पर किसी चुने हुए मुख्यमंत्री को जेल भेजना गलत परंपरा होगी।
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अमित शाह के जमानत की कहानी
किताब में यह भी दावा है कि शरद पवार और शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने अमित शाह को जमानत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह किताब मूल रूप से 2025 में मराठी में प्रकाशित हुई थी, जिसके अंग्रेजी अनुवाद का सोमवार को औपचारिक विमोचन किया गया है।
