समंदर से सीधा विनाश! रूस ने भारत को दिया ‘विध्वंसक’ हथियार का ऑफर, कितनी खतरनाक है Kalibr-PL मिसाइल?
Russian Offer to India: भारतीय नेवी ताकत भविष्य में और भी खतरनाक हो सकती है। रूस ने भारत को अपनी खतरनाक Kalibr-PL (3M-14E Club-S) सबमरीन से लॉन्च होने वाली क्रूज मिसाइल का ऑफर दिया है
- Written By: अभिषेक सिंह
पनडुब्बी से लॉन्च होती हुई मिसाइल (सोर्स- AI)
Kalibr-PL Missile: भारतीय नेवी ताकत भविष्य में और भी खतरनाक हो सकती है। रूस ने भारत को अपनी खतरनाक Kalibr-PL (3M-14E Club-S) सबमरीन से लॉन्च होने वाली क्रूज मिसाइल का ऑफर दिया है, जिसकी रेंज लगभग 1,500 किलोमीटर होने का अनुमान है।
अगर भारत यह ऑफर मान लेता है, तो भारतीय सबमरीन मिनटों में दुश्मन के गहरे समुद्र में मौजूद मिलिट्री ठिकानों को तबाह कर सकती हैं। इस काबिलियत को डिफेंस एक्सपर्ट साइलेंट स्ट्राइक पावर कहते हैं, जिसका मतलब है कि दुश्मन को इसका पता भी नहीं चलेगा और हमला पहले ही हो चुका होगा।
Kalibr-PL खतरनाक क्यों?
Kalibr-PL मिसाइल को पानी के अंदर छिपी सबमरीन से लॉन्च किया जाता है। लॉन्च के बाद, मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़कर रडार से बचती है और आखिर में बहुत तेज स्पीड से टारगेट पर हमला करती है। इसकी यही काबिलियत इसे दुनिया की सबसे खतरनाक सबमरीन से लॉन्च होने वाली स्ट्राइक मिसाइलों में से एक बनाती है।
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- मारक दूरी: लगभग 1500 किलोमीटर
- लॉन्च प्लेटफॉर्म: 533 mm टॉरपीडो ट्यूब के चलते बिना बड़े बदलाव के भारत की मौजूदा Kilo-class और Scorpene पनडुब्बियों से आसान लॉन्चिग
- सटीक हमला: GPS तकनीक से लैस उन्नत नेविगेशन सिस्टम।
- रडार से बचने की क्षमता: कम ऊंचाई की उड़ान से रडार को चकमा देने में माहिर
- तबाही का यंत्र: दुश्मन के कमांड सेंटर, एयरबेस, बंदरगाह, हथियार ठिकाने और बिजली ग्रिड जैसे टारगेट को तबाह करने में सक्षम।
क्यों अहम है यह ऑफर?
रूस का यह प्रपोज़ल ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी नेवल कैपेबिलिटीज़ को और मॉडर्न बनाने पर काम कर रहा है। इंडियन नेवी की किलो-क्लास और स्कॉर्पीन-क्लास सबमरीन पहले से ही क्लब-एस के शॉर्ट-रेंज वर्शन से इक्विप्ड हैं, लेकिन कैलिबर-पीएल के जुड़ने से यह कैपेबिलिटी काफी बढ़ जाएगी।
इससे इंडियन नेवी अरब सागर से पाकिस्तानी मिलिट्री बेस पर हमला कर सकती है और अंडमान और निकोबार आइलैंड से चीन की स्ट्रेटेजिक जगहों को टारगेट कर सकती है, जिससे इंडो-पैसिफिक में एक बड़ा स्ट्रेटेजिक बैलेंस बनेगा।
देसी मिसाइल कब मिलेगी?
भारत अपनी खुद की सबमरीन-लॉन्च्ड क्रूज़ मिसाइल (SLCM) भी डेवलप कर रहा है, लेकिन यह DRDO मिसाइल 4-6 साल में ही पूरी तरह से ऑपरेशनल हो पाएगी। इसी वजह से, एक्सपर्ट्स कैलिबर-पीएल को “ब्रिज कैपेबिलिटी” कह रहे हैं, जिसका मतलब है कि यह सिस्टम तब तक अहम रोल निभा सकता है जब तक भारत की अपनी मिसाइल तैयार नहीं हो जाती।
क्या MTCR नियम रुकावट हैं?
भारत MTCR (मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम) का मेंबर है, इसलिए 300 km से ज़्यादा रेंज वाली मिसाइलों का ट्रांसफर मुमकिन है, और इसीलिए भारत को 1500 km वाला वर्जन ऑफर किया गया है।
क्या भारत इसे खरीदेगा?
आखिरी फैसला अभी बाकी है, लेकिन यह ऑफर ऐसे समय में आया है जब प्रोजेक्ट-75I सबमरीन प्रोग्राम आगे बढ़ रहा है, मौजूदा किलो-क्लास सबमरीन 2030 के बाद रिटायर हो जाएंगी, और भारत इंडो-पैसिफिक में एक बड़ी समुद्री ताकत बन रहा है। इसलिए, मिलिट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत इस प्रपोजल पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
