समुद्र का शहंशाह बनेगा भारतीय नौसेना, SOV-400 पनडुब्बी दुश्मनों पर साधेगा सटीक निशाना

L&T 2500 Ton Submarine Design: लार्सन एंड टुब्रो की यह अगली पीढ़ी की पनडुब्बी डिजाइन नौसेना के स्वदेशीकरण अभियान को नई ऊर्जा देगी। यह पानी के नीचे युद्ध के लिए भारत की तैयारी को बदल देगी।
Indian Navy will become the king of the sea
पनडुब्बी। इमेज-एआई
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Indian Navy 2500 Ton Submarine: भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा होने वाला है। हाल में लार्सन एंड टुब्रो (L&T) डिफेंस ने अपनी अत्याधुनिक स्वदेशी पनडुब्बी डिजाइन का अनावरण कर हर किसी का ध्यान आकर्षित किया। यह डिजाइन एलएंडटी के पहले से प्रमाणित SOV-400 माइजेट पनडुब्बी प्लेटफॉर्म पर बेस्ड है, जिसका संकेत है कि भारतीय नौसेना की कई परिचालन जरूरतों के लिए समुद्र के योद्धाओं का एक परिवार तैयार किया जा रहा है।

यह नई डिजाइन, जिसे प्रमुख यूरोपीय नौसैनिक वास्तुकला फर्म द्वारा स्वतंत्र रूप से प्रमाणित किया गया है। ऐसे में प्रोजेक्ट-76 के तहत एक पूर्ण 2,500 टन की पारंपरिक हमला पनडुब्बी के डेवलपमेंट में मदद करेगी।

एलएंडटी ने लॉन्च किया डिजाइन

एलएंडटी के डिजाइन मॉडल में गहरे पानी में तैरती चिकनी, कूबड़ वाली पनडुब्बी दिखी है। यह SOV-400 स्पेशल ऑपरेशंस वेसल का हाई वर्जन है। नौसेना पुरानी बेड़े को मजबूत करने को ऐसी 6 पनडुब्बियां मांग रही है। एलएंडटी की स्वदेशी रूपरेखा विदेशी निर्भरता को कम करके लक्ष्य हासिल करने में मददगार बन सकती है।

SOV-400 माइजेट है क्या?

SOV-400 माइजेट पनडुब्बी खासकर तटीय मिशनों के लिए ऑप्टिमाइज्ड थी, जो 10 कमांडो के साथ 21 दिन तक पानी के नीचे रह सकती थी। अब इस डिजाइन को 2,500 टन के बड़ी लड़ाकू पनडुब्बी के लिए आधार बनाया गया है। इस डिजाइन में लिथियम-आयन बैटरी और नेक्स्ट-जेन सोनार सूट शामिल हैं। इससे यह भविष्य के खतरों का मुकाबला करने के लिए तैयार होगी। यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट-76 डिजाइन 2026-27 तक अंतिम रूप ले सकता है। इसका निर्माण 2030 के आसपास शुरू और पहली डिलीवरी 2037 तक होने का लक्ष्य है।

एडवांस हथियार क्षमता

पनडुब्बी की सेल पर बनी यह विशिष्ट कूबड़ जैसी संरचना वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) के एकीकरण के लिए है। यह पनडुब्बी को पानी में एक मिसाइल स्लिंगर में बदल सकती है। 2,500 टन वाले संस्करण में यह 8-12 VLS सेल को इंटीग्रेट कर सकता है। इससे सबसोनिक ब्रह्मोस SLCMs (450 किमी रेंज) या बनाए जा रहे सुपरसोनिक/ हाइपरसोनिक मिसाइलों को लॉन्च किया जा सकेगा। यह पनडुब्बी को सतह पर आए बिना जमीन या समुद्री लक्ष्यों पर सटीक हमला करने देगा।

खामोशी से करेगी हमला

इसकी सबसे बड़ी खासियत लंबे समय तक पानी के नीचे रहने और खामोशी से हमला करने की क्षमता होगी। डीजल-इलेक्ट्रिक सेटअप को डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित फ्यूल-सेल एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) से जोड़ा गया है। यह पनडुब्बी को स्नॉर्कलिंग किए बिना 2-3 सप्ताह तक पानी के नीचे गश्त करने देगा। एनेकोइक कोटिंग्स और डीएमआर 249 स्टील का इस्तेमाल करते हुए कम्पोजिट हल तत्वों के साथ यह पनडुब्बी तटीय भूत की तरह खामोशी से 80 समुद्री मील की दूरी केवल बैटरी पावर पर तय कर सकती है।

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