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Republic Day 2026: क्यों बुलाए जाते हैं विदेशी मुख्य अतिथि? जानें पहले मेहमान से लेकर 2026 तक का पूरा इतिहास

Republic Day Special: गणतंत्र दिवस की परेड में विदेशी मुख्य अतिथि को आमंत्रित करना भारत की कूटनीतिक शक्ति का प्रतीक है। जानें 1950 से शुरू हुई इस परंपरा का महत्व और इस साल के मेहमानों के बारे में।

  • Written By: प्रतीक पांडेय
Updated On: Jan 24, 2026 | 11:41 AM

गणतंत्र दिवस 2026 के चीफ गेस्ट, फोटो-नवभारत डिजाइन

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Republic Day 2026 Chief Guest: भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। इस साल कर्तव्य पथ पर यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह परंपरा केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि भारत की विदेश नीति और वैश्विक रणनीतिक संबंधों का एक शक्तिशाली संदेश है।

इस साल 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष नेतृत्व को आमंत्रित किया है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। ये नेता न केवल गणतंत्र दिवस की परेड का हिस्सा बनेंगे, बल्कि भारत-EU शिखर सम्मेलन में भी भागीदारी करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आमंत्रण भारत और यूरोप के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग, व्यापार समझौतों और वैश्विक साझेदारी को दर्शाता है।

1950 से शुरू हुई परंपरा: कौन थे पहले विदेशी मेहमान?

भारत में गणतंत्र दिवस पर विदेशी मेहमानों को बुलाने का सिलसिला 26 जनवरी 1950 से शुरू हुआ था, जब देश का संविधान लागू हुआ था। भारत के पहले गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली आए थे। उस समय भव्य परेड आज के कर्तव्य पथ के बजाय इर्विन स्टेडियम (वर्तमान मेजर ध्यानचंद स्टेडियम) में आयोजित की गई थी। राष्ट्रपति सुकर्णो का आगमन नवस्वतंत्र एशियाई देशों के बीच एकजुटता और मित्रता का एक बड़ा प्रतीक माना गया था।

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वो साल जब परेड में कोई मुख्य अतिथि नहीं था

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि हर साल विदेशी मेहमान की उपस्थिति अनिवार्य नहीं रही है। वर्ष 1952 और 1953 में गणतंत्र दिवस समारोह में कोई भी विदेशी मुख्य अतिथि शामिल नहीं हुआ था। उस समय भारत कई आंतरिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबावों से जूझ रहा था। इसके बाद, 1955 से गणतंत्र दिवस की परेड का आयोजन स्थायी रूप से राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर होने लगा। दिलचस्प बात यह है कि 1955 में राजपथ पर हुई पहली परेड के मुख्य अतिथि पाकिस्तान के तत्कालीन गवर्नर-जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद थे।

यह भी पढ़ें: Republic Day Special: ‘120 बहादुर’ से ‘बॉर्डर’ तक, देशभक्ति का जज्बा जगाएंगी ये बॉलीवुड फिल्में

चीफ गेस्ट का चयन: 6 महीने की कड़ी प्रक्रिया और रणनीतिक सोच

गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि का चयन कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है। विदेश मंत्रालय इस काम को करीब 6 महीने पहले ही शुरू कर देता है। अतिथि का चयन करते समय भारत निम्नलिखित पहलुओं पर गहराई से विचार करता है:

  • द्विपक्षीय संबंध: संबंधित देश के साथ भारत के राजनीतिक और आर्थिक रिश्ते कैसे हैं।
  • सैन्य और रक्षा सहयोग: क्या उस देश के साथ भविष्य में कोई बड़ा रक्षा समझौता होने वाला है।
  • अंतरराष्ट्रीय कूटनीति: वैश्विक मंच पर भारत उस देश के माध्यम से क्या संदेश देना चाहता है।

पूर्व राजनयिकों का मानना है कि चीफ गेस्ट का आमंत्रण यह संकेत देता है कि भारत आने वाले समय में किन देशों या संगठनों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ बनाना चाहता है।

गणतंत्र दिवस का महत्व और लोकतांत्रिक संदेश

26 जनवरी को परेड में विदेशी नेता की मौजूदगी दुनिया को भारत की लोकतांत्रिक ताकत का एहसास कराती है। यह परंपरा अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मित्रता का संदेश देने का एक मंच है। गणतंत्र दिवस के माध्यम से भारत अपनी सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन तो करता ही है, साथ ही विदेशी अतिथि के जरिए अपनी भविष्य की रणनीतियों की दिशा भी तय करता है। इस प्रकार, चीफ गेस्ट का चयन भारतीय विदेश नीति का एक अहम हिस्सा बन चुका है, जो भारत के वैश्विक दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान करता है।

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Published On: Jan 24, 2026 | 11:36 AM

Topics:  

  • Republic Day
  • Today Hindi News

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