…ये मेरा मोहम्मद! टैटू और कपड़ों से अपनों को पहचाना; धमाके के शवों की शिनाख्त की दर्दनाक कहानी
Delhi में लाल किले के पास हुए कार विस्फोट के एक दिन बाद मंगलवार को एलएनजेपी अस्पताल का मंजर दिल दहला देने वाला था। यहां 8 शव अपनों को सौंपे गए। शव इतनी बुरी हालत में थे कि उनकी पहचान तक मुश्किल थी।
- Written By: सौरभ शर्मा
दिल्ली धमाके की शवों की शिनाख्त के पीछे की दर्दनाक कहानी (फोटो- सोशल मीडिया)
Delhi blast victims identification: दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार विस्फोट के एक दिन बाद मंगलवार को एलएनजेपी अस्पताल का मंजर दिल दहला देने वाला था। यहां 8 शव अपनों को सौंपे गए। ये शव इतनी बुरी हालत में थे कि उनकी पहचान तक मुश्किल थी। किसी ने अपने बेटे को उसके हाथ पर बने टैटू से पहचाना, तो किसी ने कपड़ों के टुकड़ों से अपने ‘मोहम्मद’ की शिनाख्त की। ये सिर्फ मौतें नहीं थीं, बल्कि उन सपनों का अंत था जो टैक्सी ड्राइवर, दुकानदार और बस कंडक्टर अपनी आंखों में लेकर दिल्ली आए थे।
इस धमाके ने कई परिवारों के इकलौते कमाने वाले चिरागों को हमेशा के लिए बुझा दिया। मरने वालों में 34 साल के व्यवसायी अमर कटारिया थे, जो शाम को मेट्रो पकड़ने जा रहे थे। 35 साल के मोहम्मद जुनमान थे, जो अपना ई-रिक्शा चलाकर परिवार पालते थे। 22 साल का पंकज भी था, जो मीशो से नौकरी जाने के बाद कैब चलाने लगा था। ये सभी उस शाम बस अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे, जब विस्फोट ने सब कुछ तबाह कर दिया।
‘डैड माय स्ट्रेंथ’ टैटू और नीली शर्ट से हुई शवों की शिनाख्त
अमर कटारिया के पिता जगदीश कटारिया ने कभी नहीं सोचा था कि जिस टैटू पर उन्हें गर्व था, वही बेटे की शिनाख्त कराएगा। अमर के हाथ पर ‘मॉम माय फर्स्ट लव’, ‘डैड माय स्ट्रेंथ’ और ‘कृति’ लिखा था। पिता ने बताया कि अस्पताल से फोन आया, ‘मॉम माय फर्स्ट लव’ टैटू वाला आपका क्या लगता है? जाकर देखा तो वह मेरा बेटा था। इसी तरह, 35 वर्षीय मोहम्मद जुनमान का परिवार उन्हें रातभर खोजता रहा क्योंकि उनका फोन बंद था। अस्पताल में उनके चाचा इदरीस ने जुनमान की नीली शर्ट और जैकेट देखकर कहा- ‘ये मेरा मोहम्मद है।’ जुनमान की पत्नी दिव्यांग हैं और 3 बच्चे अब अनाथ हो गए हैं।
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घर चलाने का सपना अधूरा रह गया
22 वर्षीय नौमान अंसारी यूपी के शामली से अपनी कॉस्मेटिक्स दुकान के लिए सामान खरीदने दिल्ली आया था। विस्फोट ने उसकी जान ले ली और चचेरा भाई अमन घायल हो गया। नौमान परिवार में एकमात्र कमाने वाला था, क्योंकि बड़े भाई किडनी फेलियर के कारण घर पर थे। उत्तर-प्रदेश के मेरठ के रहने वाले 35 साल के मोहसिन भी बेहतर जीवन की तलाश में दिल्ली आकर ई-रिक्शा चलाते थे।
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उनकी मौत के बाद परिवार में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हुआ। पत्नी सुल्ताना दिल्ली में दफन चाहती थीं, जबकि परिवार मेरठ ले जाना चाहता था। बाद में पुलिस की मदद से मेरठ में अंतिम संस्कार हुआ। 22 वर्षीय पंकज को मीशो ने नौकरी से निकाल दिया था, जिसके बाद वह कैब चलाने लगा। वह पड़ोसी को छोड़ने लाल किला गया था। साले निकेश कुमार ने बताया कि धमाके के बाद पंकज का फोन नहीं मिला। ढूंढने पर आधी जली कार मिली और अंत में मॉर्चुरी में पंकज का शव मिला।
