

Akola Farmer Conference: भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की आवाज बुलंद करने के लिए देशभर में संगठित आंदोलन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा और उस समय अकोला सहित पूरे विदर्भ के किसानों को भी मजबूती से साथ देना होगा। वे यहां प्रमिलाताई ओक हॉल सभागार में आयोजित किसान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
टिकैत ने किसानों से आह्वान किया कि वे हर महीने एक निश्चित दिन तय कर 50 से 100 किसानों के समूह के साथ जिलाधिकारी से मुलाकात करें और खेती से जुड़े विभिन्न मुद्दों को सामूहिक रूप से उठाएं। इससे किसानों की समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल होगी। उन्होंने कहा कि विभिन्न किसान संगठनों को संयुक्त मोर्चा बनाकर जिला स्तर पर आंदोलन शुरू करना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक जिले में होने वाले आंदोलनों की जानकारी दिल्ली तक पहुंचती है।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से किसान आंदोलन में अधिक से अधिक भागीदारी निभाने की अपील की। भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी युद्धवीर सिंह ने कहा कि किसान परिवार सुबह चार बजे से रात तक मेहनत करता है, लेकिन उसे दो वक्त की रोटी लायक आय भी नहीं मिलती। उन्होंने इसका कारण सरकार की नीतियों को बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार के नेता लगातार झूठे आश्वासन देते रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय किसान यूनियन कोई राजनीतिक संगठन नहीं है, बल्कि पिछले 50 वर्षों से किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है और सभी किसानों से आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान नेता तेजराव भाकरे ने की। प्रमुख मार्गदर्शक के रूप में प्रदेशाध्यक्ष चंद्रशेखर नलावडे, सचिव रूपाली पाटिल, राजवीर जदौन सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। किसान जागर मंच के प्रशांत गावंडे ने भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते की जानकारी देते हुए उसके संभावित प्रभावों पर प्रकाश डाला तथा राकेश टिकैत का परिचय कराया। कार्यक्रम का संचालन अक्षय राऊत ने किया।
अपने अध्यक्षीय भाषण में तेजराव भाकरे ने वर्हाड़ी बोली में किसानों की समस्याएं और ग्रामीण क्षेत्र की बदहाल स्थिति का मार्मिक चित्रण किया। उन्होंने बताया कि उनके गांव की सड़क का काम पिछले 30 वर्षों से अधूरा पड़ा है और हर चुनाव में नेताओं द्वारा केवल आश्वासन दिए जाते हैं। उनके व्यंग्यात्मक अंदाज पर सभागार में उपस्थित लोगों ने जोरदार प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने भारतअमेरिका कृषि व्यापार समझौते के विरोध में चल रहे आंदोलन में सभी किसानों से एकजुट होकर भाग लेने की अपील की। कार्यक्रम की शुरुआत कृषि और मिट्टी पर आधारित कविताओं से हुई। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से किसानों की पीड़ा और संघर्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विठ्ठल कुलट, किशोर बली, विशाल कुलट सहित अन्य कवियों ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं।