'बाहुबली से बायो युग की ओर बढ़ रहा यूपी', बोले-रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह; ऑपरेशन सिंदूर पर किया बड़ा खुलासा

Rajnath Singh: विश्व पर्यावरण दिवस पर लखनऊ में आयोजित ‘बायोयुग’ कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में स्वदेशी रक्षा क्षमता की अहम भूमिका रही।
Defence Minister Rajnath Event On World Environment Day
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह फाइल फोटो ( सोर्स सोशल मीडिया)
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Defence Minister Rajnath Singh: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लखनऊ में आयोजित ‘बायोयुग’ कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हुए। इस दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के बाद भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया। भारतीय सेनाओं ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचों को सटीक निशाना बनाकर ध्वस्त किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इस सफलता के पीछे भारतीय सेनाओं का ऊंचा मनोबल और स्वदेशी रक्षा क्षमता प्रमुख कारण रही। हम यह इसलिए कर पाए क्योंकि हमारे पास स्वदेशी हथियार थे और हम किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं थे। यही सामर्थ्य हमें ऊर्जा, ईंधन और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी प्राप्त करनी होगी, जिससे हमारा देश अन्य देशों की तुलना में पिछे ना रहे।

बायोफ्यूल आत्मनिर्भर भारत की ताकत

रक्षा मंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल स्वच्छता तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राष्ट्रीय शक्ति और सुरक्षा से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सैनिकों के मनोबल को और मजबूती प्रदान करता है। इसके साथ साख राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहा है। रक्षा मंत्री ने कहा कि जब देश अपने खेतों, फसलों और जैविक संसाधनों से ऊर्जा पैदा करता है, तब वह बाहरी दबावों के मुकाबले और भी अधिक मजबूत बनता है। उन्होंने अपने संबोधन में आगे कहा कि ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और स्वदेशी संसाधनों पर आधारित आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने की आवश्यकता है।

पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण

राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्तमान में भारत पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण कर रहा है, जिसको मुख्य रूप से गन्ने और कृषि उत्पादों के द्वारा तैयार किया जाता है। “यह 20 प्रतिशत एथेनॉल हमारे लिए एक बफर की तरह था, जिसने अर्थव्यवस्था को बड़े झटके से बचाया। बायोफ्यूल सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का माध्यम ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का भी एक महत्वपूर्ण हथियार है।”आपको बता दें कि पश्चिम एशिया में भारी संकट और वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल के समय यही एथेनॉल मिश्रण जिसे हम गन्ने और कृषि उत्पादों से बनाते थे वही भारत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रुप में साबित हुआ था।

बायोप्लास्टिक उद्योग को बढ़ा रही सरकार

राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश में बायोप्लास्टिक उद्योग की संभावनाओं की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की बायोप्लास्टिक इंडस्ट्री नीति इस क्षेत्र को नई गति दे रही है। उन्होंने गन्ने से तैयार होने वाले पीएलए (पॉली-लैक्टिक एसिड) आधारित बायोप्लास्टिक का जिक्र करते हुए कहा कि यह पूरी तरह जैव-अवक्रमणीय (बायोडिग्रेडेबल) है ,जो पर्यावरण के लिए अनुकूल विकल्प साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक प्लास्टिक आज एक “आवश्यक बुराई” बन चुका है, लेकिन बायोप्लास्टिक के माध्यम से इस बुराई को प्रकृति के अनुकूल बनाया जा सकता है।

बायोयुग की ओर बढ़ रहा उत्तर प्रदेश

राजनाथ सिंह कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में बायो-इकोनॉमी को बढ़ावा मिला है। गन्ना किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों के क्षेत्र में काफी विस्तार देखने को मिला है। मध्य-पूर्व में हाल के संकटों के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला थोड़ी प्रभावित हुई, जिस कारण कई प्लास्टिक उद्योगों को कच्चे माल की कमियों का सामना करना पड़ा।

यदि भारत गन्ने और कृषि आधारित संसाधनों से बायोप्लास्टिक के उत्पादन को निरन्तर बढ़ाता है, तो विदेशी निर्भरता कम होगी और देश की आर्थिक सुरक्षा और स्थिति दोनो मजबूत होगी। उन्होंने आगे यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश अब ‘बाहुबली युग’ से आगे बढ़कर ‘बायोयुग’ की ओर आगे बढ़ रहा है। जहां विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता दोनो ही आगे बढ़ रहे हैं।

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