Supreme Court: पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने पर रोक की याचिका खारिज, कहा- पहले ही दिए जा चुके हैं कई आदेश
Supreme Court ने पराली जलाने पर रोक करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इसमें कहा गया कि पंजाब और हरियाणा सरकार को पराली जलाने पर नियंत्रण लगाने के लिए सख्त कदम उठाना चाहिए।
- Written By: सौरभ शर्मा
सांकेतिक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका पर्यावरण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़ ने दायर की थी, जिसमें पंजाब और हरियाणा सरकार को इस समस्या पर सख्त कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं सिर्फ दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अदालत पहले ही इस मामले में कई आदेश जारी कर चुकी है और इस पर विचार जारी है। ऐसे में अब नए आवेदन स्वीकार करने की कोई जरूरत नहीं है।
याचिका में कहा गया था कि पराली जलाने से हर साल दिल्ली और आसपास के राज्यों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है, जिससे लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसमें यह भी तर्क दिया गया कि सरकारें और संबंधित एजेंसियां सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा करने में विफल रही हैं, क्योंकि अदालत द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों का सही से पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
पराली जलाने से बढ़ती है सांस की बीमारियां
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे खतरनाक कणों को बढ़ा देता है, जो फेफड़ों और हृदय रोगों का कारण बन सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह प्रदूषण बेहद घातक साबित हो सकता है। अदालत ने इस मामले में यह भी साफ कर दिया कि पराली जलाने का मुद्दा अदालत की निगरानी में पहले से ही लंबित है और इस पर समय-समय पर आदेश दिए जाते रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी पक्ष को इस मुद्दे पर कोई आपत्ति या समाधान चाहिए, तो उसे इसी मामले में दायर करना होगा, अलग से नई याचिका स्वीकार नहीं की जाएगी।
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सरकार के पास क्या हैं विकल्प?
पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए सरकार विभिन्न उपायों पर विचार कर रही है, जिनमें किसानों को पराली प्रबंधन के लिए अनुदान देना और नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है। हालांकि, यह समस्या हर साल बड़े स्तर पर दोहराई जाती है, जिससे यह साफ होता है कि मौजूदा प्रयास अभी भी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सके हैं।
