उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत पर पुनर्विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट, CJI की बेंच को भेजा गया मामला
Umar Khalid Sharjeel Imam Bail: कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत से इनकार करने के फैसले को बड़ी बेंच में भेजने का निर्णय लिया है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
उमर खालिद और शरजील इमाम
Supreme Court on Umar Khalid Sharjeel Imam Bail: सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत से इनकार करने के फैसले को बड़ी बेंच में भेजने का निर्णय लिया है। अदालत उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज करने वाले फैसले पर पुनर्विचार करेगी। यूएपीए के तहत जमानत पर मतभेद होने के बाद यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने बड़ी बेंच को सौंपने के लिए रखा जाएगा।
बता दें कि सोमवार को जस्टिस उज्ज्वल भुयान की अध्यक्षता वाली बेंच ने उमर खालिद के फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि इसमें देरी के आधार पर बेल नहीं दी गई है। वहीं, आज उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज करने वाली बेंच ने कहा कि समान शक्ति वाली बेंच इतनी कड़ी टिप्पणी नहीं कर सकती। सर्वोच्च अदालत का कहना है कि उमर खालिद के फैसले का उद्देश्य पहले के फैसलों को कमजोर करना नहीं था, बल्कि इस फैसले ने विधायी मंशा को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इसको समझना जरूरी है।
दिल्ली दंगे के आरोपियों को राहत देने पर विचार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संकेत दिया कि वह 2020 के दिल्ली दंगे के दो आरोपियों को अंतरिम जमानत दे सकता है। कोर्ट ने कहा कि वह दिल्ली पुलिस की इस दलील पर विचार करेगा कि यूएपीए मामलों में जमानत के कानूनी प्रश्न को एक बड़े बेंच के पास भेजा जाए, क्योंकि इस मामले पर विरोधाभासी विचार हैं। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने संकेत दिया कि पूरी संभावना है कि वह 2020 के दिल्ली दंगों के दो आरोपियों को जमानत देने को लेकर विचार करेगी।
सम्बंधित ख़बरें
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CBI जांच की याचिका खारिज की, SC में पहले से लंबित है केस
Raja Raghuvanshi Murder Case: SC में सोनम रघुवंशी की जमानत पर सुनवाई के बाद परिवार का बड़ा बयान। देखें VIDEO
राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने सोनम को नोटिस जारी कर पूछा- क्यों न आपकी जमानत रद्द कर दी जाए
‘अदृश्य और बेहद खतरनाक’, AI पर सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी चेतावनी; बोला- इंसानी दखल है जरूरी
दिल्ली पुलिस की दलील
वहीं, दिल्ली पुलिस ने यह कहते हुए दोनों आरोपियों की जमानत का विरोध नहीं किया कि वो मुख्य आरोपी नहीं हैं। हालांकि दिल्ली पुलिस ने अदालत से पूछा कि क्या अजमल कसाब को मुकदमे में देरी के आधार पर बेल दी जा सकती थी।
यह भी पढ़ें- कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला! 2022 दंगों के दौरान दर्ज किए गए मामलों को लिया वापस, BJP ने उठाए सवाल
दिल्ली पुलिस ने मामले को बड़ी बेंच के सामने भेजने का अनुरोध करते हुए पूछा कि क्या लंबे समय तक कारावास और मुकदमे में देरी, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) जैसे आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत जमानत पर कानूनी प्रतिबंधों को रद्द कर सकती हैं।
