साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट बैठक आज, फोटो- नवभारत
Last Cabinet Meeting South Block: आजादी के बाद से देश की नीति और नियति तय करने वाला ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक शुक्रवार को एक भावुक विदाई का गवाह बनेगा। कल शाम 4 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहां अंतिम कैबिनेट बैठक होगी, जिसके बाद पीएमओ सेंट्रल विस्टा के आधुनिक परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित हो जाएगा।
भारत की राजनीति का करीब 80 वर्षों तक केंद्र रहे साउथ ब्लॉक से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अपनी ऐतिहासिक विदाई ले रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस शुक्रवार (13 फरवरी) को होने वाली कैबिनेट की बैठक बेहद खास और सांकेतिक होगी। यह बैठक इस ऐतिहासिक इमारत के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करने के लिए आयोजित की जा रही है, जहां से दशकों तक भारत सरकार का संचालन होता रहा है।
साउथ ब्लॉक का इतिहास स्वतंत्र भारत के जन्म के साथ जुड़ा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, इस इमारत में पहली कैबिनेट बैठक 15 अगस्त 1947 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुई थी। अब करीब 80 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली यह अंतिम बैठक एक युग के अंत और नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक बनेगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय अब सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत नवनिर्मित परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होगा। करीब 1,189 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह परिसर 2,26,203 वर्ग फुट के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका निर्माण दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा किया गया है।
इस आधुनिक परिसर में तीन मुख्य इमारतें तैयार की गई हैं:
विजय चौक के नजदीक बना यह नया कार्यालय अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। वैसे तो कैबिनेट की बैठकें प्राय: प्रधानमंत्री आवास (7 लोक कल्याण मार्ग) पर होती आई हैं, लेकिन नए ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में विशेष रूप से एक कैबिनेट हॉल तैयार किया गया है।
इसी परिसर के पास नया प्रधानमंत्री आवास भी बनाया जा रहा है, जो संसद भवन के काफी करीब है। इस पूरी शिफ्टिंग का एक मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री के मूवमेंट को सुगम बनाना और उनके आवागमन के दौरान आम जनता को होने वाली ट्रैफिक संबंधी परेशानियों को कम करना है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के खाली होने के बाद साउथ ब्लॉक और उसके साथ वाले नॉर्थ ब्लॉक को सुरक्षित रखने की एक बड़ी योजना है। इन दोनों ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ नाम से एक भव्य सार्वजनिक संग्रहालय में तब्दील किया जाएगा।
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नॉर्थ ब्लॉक में संग्रहालय बनाने का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है। इस बदलाव का मकसद यह है कि आने वाली पीढ़ियां भारत की प्रशासनिक विरासत और इतिहास को करीब से देख सकें और उसे महसूस कर सकें।