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अबकी बार मजबूत नहीं मज़बूर सरकार चलाएंगे पीएम नरेन्द्र मोदी, सामने आया पहला उदाहरण!
- Written By: अभिषेक सिंह
दिल्ली के तख़्त पर काबिज हुई मोदी सरकार इस बार मजबूत सरकार के तौर पर नहीं, बल्कि मज़बूर सरकार की तरह काम करती दिखाई देगी! जिसका पहला उदाहरण मंत्रिमंडल के गठन में ही सामने आ गया है।

(प्रतीकात्मक चित्र)
नई दिल्ली : दिल्ली के तख़्त पर काबिज हुई मोदी सरकार इस बार मजबूत सरकार के तौर पर नहीं, बल्कि मज़बूर सरकार की तरह काम करती दिखाई देगी! जिसका पहला उदाहरण मंत्रिमंडल के गठन में ही सामने आ गया है। बीजेपी की मज़बूरी साफ तौर पर सामने आ चुकी है। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं? जानने के लिए यह रिपोर्ट आपको शुरू से आख़िर तक पढ़नी होगी।
लोकसभा चुनाव परिणाम और शपथ ग्रहण के बाद मोदी 3.0 मंत्रिमंडल का भी गठन हो चुका है। इतना ही नहीं सोमवार को नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया है। हालांकि, इस मंत्रिमंडल में कई ऐसे नाम हैं जिन्हें बीजेपी के बनाए गए नियम के मुताबिक जगह नहीं मिलनी चाहिए थी। लेकिन बीजेपी ने इन नामों को शामिल कर के अपने ही नियम को तोड़ दिया है। जिसे अगर मज़बूरी की संज्ञा दी जाए तो ग़लत नहीं होगा।
जीतन राम मांझी बने कैबिनेट मंत्री
मोदी 3.0 के मंत्रिमंडल में नियम तोड़कर जो सबसे पहला नाम शामिल किया गया है वो है हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और गया से सांसद जीतन राम मांझी का। मांझी की उम्र 79 वर्ष हो चुकी है। बीजेपी के नियम के मुताबिक 75+ से ऊपर के लोगों को मंत्रालय की जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए थी। क्योंकि 2016 में हुए मोदी सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार से पहले 6 मंत्रियों से उम्र का हवाला देते हुए इस्तीफा मांग लिया गया था।
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एमपी-गुजरात में भी हुए थे इस्तीफे
मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार में मंत्री बाबूलाल और सरताज सिंह से भी 2016 में इस्तीफा लिया गया था। दोनों ही 75 वर्ष की उम्र पार कर चुके थे। इसके अलावा गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को भी इस्तीफा देना पड़ा था। जिसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया था। इसके अलावा 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान भी 75 साल या उससे अधिक उम्र के किसी भी नेता को बीजेपी ने उम्मीदवार नहीं बनाया था।
2014 में ही हो गई थी शुरुआत!
75+फार्मूले को बीजेपी ने मंत्रिमंडल में लागू भले ही 2016 में किया लेकिन इसकी शुरुआत 2014 में ही हो गई थी। तब पार्टी ने मार्गदर्शक मंडल बनाया था। जिसमें 75 साल से अधिका उम्र होने के चलते दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवत सिन्हा को शामिल किया गया था।
पीएम समेत 9 मंत्री 71 साल के ऊपर
इस बार मंत्रिमंडल में कई जीतनराम मांझी के अलावा कई ऐसे नाम जिन्हें अगर पार्टी 75+ वाला नियम फॉलो करती है तो बीच कार्यकाल में ही इस्तीफा देना पड़ सकता है। इसमें राव इंद्रजीत सिंह और रामनाथ ठाकुर अगले साल ही 75 साल के हो जाएंगे। इसके अलावा पीएम मोदी ख़ुद भी 2 साल बाद 75 वर्ष का पड़ाव पार कर जाएंगे। इतना ही नहीं वी सोमन्ना (73), राजनाथ सिंह (72), हरदीप सिंह पुरी (72), गिरिराज सिंह (71) और श्रीपद नाईक (71) भी इस बार कार्यकाल पूरा करने से पहले 75 साल की उम्र क्रॉस कर जाएंगे।
चुनाव के दौरान दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी यह मुद्दा उठाया था। केजरीवाल नें कहा था कि पीएम मोदी 75 साल की उम्र मे रिटायर हो जाएंगे और अमित शाह प्रधानमंत्री बनेंगे। हालांकि, जिस प्रकार से जीतन राम मांझी को कैबिनेट में जगह दी गई है, उस लिहाज से देखा जाए तो इस नियम के तहत शायद ही किसी मंत्री को कार्यकाल ख़त्म होने से पहले इस्तीफा देना पड़ेगा। क्योंकि नियम तो टूट चुका है।
Pm narendra modi will run a helpless government this time
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