पीएम मोदी की आपत्तिजनक AI फोटो पोस्ट करने वाला बिहार से गिरफ्तार (सोर्स-सोशल मीडिया)
Arrest For Fake AI Images: दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने बिहार के अरवल जिले से एक ऐसे व्यक्ति को दबोचा है जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बिगाड़ने की कोशिश की। आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का गलत इस्तेमाल कर आपत्तिजनक तस्वीरें बनाईं और उन्हें विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर वायरल कर दिया। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक गुप्त सूचना के आधार पर बिहार के अरवल जिले के मौलानाचक गांव में छापेमारी की। स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर की गई इस संयुक्त कार्रवाई में सिद्धनाथ कुमार नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर आगे की पूछताछ और कानूनी कार्यवाही के लिए दिल्ली लाया गया है।
जांच में पता चला कि सिद्धनाथ ने आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री मोदी की आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार की थीं। इन फर्जी तस्वीरों को आरोपी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए जनता को गुमराह करने के इरादे से पोस्ट किया था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि ऐसी सामग्री का प्रसार सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने और शांति भंग करने की एक सोची-समझी साजिश थी।
आरोपी की करतूतें केवल प्रधानमंत्री तक ही सीमित नहीं थीं बल्कि उसने महिला नेताओं की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई। उसने भाजपा की एक महिला विधायक और विदेश की एक प्रमुख महिला राजनेता की मॉर्फ्ड यानी बदली हुई तस्वीरें भी साझा की थीं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन तस्वीरों को किन-किन नेटवर्क्स के जरिए और कितनी दूर तक फैलाया गया।
दिल्ली के लोधी कॉलोनी स्थित स्पेशल सेल में आरोपी सिद्धनाथ कुमार के खिलाफ विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की गई है। उसके ऊपर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 336(4) जालसाजी, 356 मानहानि और 351(1) आपराधिक धमकी के तहत मामला दर्ज हुआ है। जांच एजेंसियां अब आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही हैं ताकि सबूत जुटाए जा सकें।
पुलिस अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि इस मामले में अभी कई और कड़ियों को जोड़ना बाकी है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इस साजिश के पीछे कोई बड़ा समूह या संगठन काम कर रहा है। आरोपी के बैंक खातों और पिछले कुछ महीनों की ऑनलाइन गतिविधियों का भी बारीकी से निरीक्षण किया जा रहा है।
AI से बनी डीपफेक और आपत्तिजनक तस्वीरें वर्तमान समय में साइबर सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। सरकार और पुलिस विभाग इन तकनीकों के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए नए दिशा-निर्देशों पर तेजी से काम कर रहे हैं। इस मामले में हुई गिरफ्तारी ने यह संदेश दिया है कि डिजिटल दुनिया में किया गया कोई भी अपराध कानून की नजर से बच नहीं सकता।
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इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने वालों को सख्त चेतावनी जारी की है। पुलिस की आईटी टीम लगातार इंटरनेट पर ऐसी संदिग्ध गतिविधियों और फर्जी अकाउंट्स पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे बिना जांच-परख के किसी भी भ्रामक सामग्री को आगे शेयर न करें।