

Home Minister Amit Shah Political Career: भारत के केंद्रीय गृहमंत्री और चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का आज 62वां जन्मदिन है। अमित शाह की चाणक्य रणनीति और पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनकी गहरी दोस्ती से पूरा देश वाकिफ है, लेकिन क्या आपको यह पता है कि अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली मुलाकात कब हुई थी और आखिर वे इतने घनिष्ठ मित्र कैसे बने।
ऐसे में आज हम आपको अमित शाह की पूरी कहानी बताएंगे। उनका बचपन कैसा रहा? कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी पहली मुलाकात हुई? कैसे मोदी-शाह की दोस्ती बढ़ी और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा?
सभी जानते है कि अमित शाह गुजरात से आते है लेकिन उनका जन्म 22 अक्तूबर 1964 को महाराष्ट्र के मुंबई में एक व्यापारी के परिवार में हुआ था। उनके दादा मनसा (गुजरात) के नगरसेठ हुआ करते थे। उनके पिता, अनिल चंद्र शाह, PVC पाइप के एक प्रमुख व्यापारी थे।
मेहसाणा में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, शाह बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई करने के लिए अहमदाबाद आ गए और C. U. शाह साइंस कॉलेज में दाखिला लिया। उन्होंने इसी संस्थान से बायोकेमिस्ट्री में B.Sc. की डिग्री हासिल की और इसके बाद अपने पिता के कारोबार में मदद करने लगे। इस दौरान, शाह ने अहमदाबाद में सहकारी बैंकों के लिए स्टॉकब्रोकर के तौर पर भी काम किया।
अमित शाह शुरू से ही वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे। बचपन से ही वह संघ से जुड़े रहे। 1982 में कॉलेज के दिनों में उनकी मुलाकात नरेंद्र मोदी से हुई। यह वह समय था जब नरेंद्र मोदी संघ के प्रचारक हुआ करते थे और युवाओं से जुड़ी गतिविधियों का नेतृत्व करते थे।
1983 में उनके कदम राजनीति की ओर मुड़े। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) जॉइन कर ली। यहां काम करने के चार साल बाद 1987 में शाह भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा से जुड़े। ठीक इसके साल भर बाद नरेंद्र मोदी भी संघ के दायित्वों से बाहर निकले और भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े।
अमित शाह ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) में बहुत कड़ी मेहनत की। उन्होंने वार्ड सचिव, तालुका सचिव और राज्य सचिव के पदों पर काम किया, और बाद में उपाध्यक्ष और महासचिव बने। शाह की सबसे बड़ी ताकत उनकी प्रबंधन शैली (मैनेजमेंट स्कील) है। 1991 में, जब लाल कृष्ण आडवाणी ने गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा, तो शाह ने चुनाव प्रचार के प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी संभाली।
1995 में, भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार गुजरात में सरकार बनाई। यह वो समय था जब गुजरात के ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस पार्टी बेहद मजबूत थी। इस मजबूती पार्टी के सामने खड़े होने के लिए नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने मिलकर गांव-गांव का दौरा किया।
उन्होंने स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों को पार्टी से जोड़ा। मोदी-शाह ने खासकर उन लोगों को अपने साथ रखा जो ग्राम प्रधान के चुनावों में दूसरे स्थान पर रहे थे। इस पहल से गांवों में भाजपा का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करने में मदद मिली।
1999 में, अमित शाह अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष चुने गए। इन चुनावों में कुछ खास जातियों का दबदबा हुआ करता था। आमतौर पर पटेल, गडरिया या क्षत्रिय समुदायों के उम्मीदवार ही जीतते थे। हालांकि शाह इनमें से किसी भी समुदाय से नहीं आते थे, फिर भी उन्होंने अपनी रणनीतिक सूझबूझ और अपनी चाणक्य नीति का इस्तेमाल कर जीत हासिल की।
जब शाह ने अध्यक्ष का पद संभाला, तब बैंक 36 करोड़ रुपये के घाटे में चल रहा था। एक साल के अंदर-अंदर उन्होंने इस घाटे को 27 करोड़ रुपये के मुनाफे में बदला। वर्मतान की बात करें तो आज यह बैंक 250 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमा रहा है।
मोदी-शाह की जोड़ी ने गुजरात में हर मोर्चे पर कांग्रेस को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया। राजनीतिक झटके देने के साथ-साथ, उन्होंने राज्य की विभिन्न खेल और संगठनात्मक संस्थाओं से कांग्रेस से जुड़े लोगों को हटाना भी शुरू कर दिया। उन्होंने गुजरात राज्य शतरंज संघ, गुजरात क्रिकेट संघ और गुजरात राज्य वित्तीय निगम जैसी संस्थाओं में प्रमुख नेतृत्वकारी भूमिकाएं संभालीं।
1997 में, शाह ने सरखेज निर्वाचन क्षेत्र से गुजरात विधानसभा का उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2012 तक, वे लगातार हर चुनाव में यह सीट जीतते रहे। 2002 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने अमित शाह को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। उस समय, शाह सबसे युवा मंत्री थे और उनके पास कई महत्वपूर्ण विभाग थे।
नरेंद्र मोदी को शाह पर इतना भरोसा था कि उन्होंने उन्हें गृह, कानून, जेल, सीमा सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा सहित 12 विभागों की जिम्मेदारी सौंप दी। बाद में, शाह कई विवादों में घिर गए; उन पर गुजरात दंगों के दौरान 'फर्जी मुठभेड़' (फेक एनकाउंटर) करवाने और कई अन्य गंभीर आरोप लगे।
इसके बाद, केंद्र में सरकार बनने के साथ, शाह एक 'चाणक्य' (कुशल रणनीतिकार) के रूप में उभरे। 2014 में जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तो वे अमित शाह को राष्ट्रीय राजनीति में ले आए। शाह को भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया और उन्हें राज्यसभा का सदस्य भी बनाया गया। वे लगातार दो कार्यकाल तक पार्टी अध्यक्ष रहे।