क्या PM मोदी को पहले से थी ईरान पर हमले की खबर? इजरायल दौरे के बीच उठी चर्चाओं पर भारत सरकार ने तोड़ी चुप्पी
PM Narendra Modi: सरकार की इस सफाई को अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार है जब भारत ने ईरान युद्ध को लेकर अपनी जानकारी और भूमिका को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा है।
- Written By: मनोज आर्या
इजरायली पीएम बेजामिन नेतन्याहू के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, (सोर्स- सोशल मीडिया)
PM Modi Israel Visit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इजरायल दौरे और उसके बाद ईरान पर हुए हमले को लेकर उठे सवालों पर अब सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि ईरान पर हमले के बारे में इजरायल की ओर से भारत के साथ कोई पूर्व चर्चा नहीं की गई थी। यानी इस कार्रवाई की जानकारी भारत सरकार को पहले से नहीं थी।
गौरतलब है कि पीएम मोदी ने 25 और 26 फरवरी को दो दिवसीय इजरायल का दौरा किया था, जो उनके मित्र देश का दूसरा ऐतिहासिक दौरा रहा। इससे पहले वे जुलाई 2017 में पहली बार इजरायल गए थे, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला आधिकारिक इजरायल दौरा भी था।
28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमला
इस बार के दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच एआई, साइबर सुरक्षा, शिक्षा समेत कुल 16 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिली। इसके कुछ समय बाद 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर संयुक्त हमला किया, जिसके बाद यह सवाल उठने लगे थे कि क्या भारत को इसकी पहले से जानकारी थी।
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सरकार ने अपनी भूमिका स्पष्ट किया
सरकार की इस सफाई को अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार है जब भारत ने ईरान युद्ध को लेकर अपनी जानकारी और भूमिका को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा है। इजरायल और अमेरिका के हमलों से ईरान में भारी तबाही की खबरें सामने आई हैं। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की परमाणु क्षमता अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है और आने वाले कुछ दिनों में यह युद्ध समाप्त हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान की ओर से सीजफायर की गुजारिश की गई है।
हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है और साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है। तेहरान के इस रुख के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुच (Strait of Hormuz) को बंद किए जाने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है।
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नाटो देशों का ट्रंप के समर्थन से इनकार
दूसरी ओर इस युद्ध में अमेरिका को अपने सहयोगी NATO देशों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और स्पेन समेत कई देशों ने खुलकर साथ देने से इनकार कर दिया है। इन परिस्थितियों में डोनाल्ड ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए यहां तक कहा है कि वे नाटो से बाहर निकलने पर भी विचार कर रहे हैं, जिससे वैश्विक राजनीति और सुरक्षा समीकरणों में और अनिश्चितता बढ़ सकती है।
