CCS में ऊर्जा और खाद आपूर्ति पर गहरा मंथन: पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी की बड़ी बैठक
CCS Meeting Review: पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर CCS की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। इसमें पीएनजी, एलपीजी और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रणनीति पर चर्चा हो रही है।
- Written By: प्रिया सिंह
पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी की बैठक (सोर्स-सोशल मीडिया)
West Asia Crisis Supply Chain Impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (CCS) की इस बैठक में देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर चर्चा हो रही है। पश्चिम एशिया संकट के आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने ऊर्जा और उर्वरक क्षेत्र की बारीकी से समीक्षा की जा ही है। बैठक में रक्षा मंत्री और गृह मंत्री सहित कई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री मौजूद हैं।
अहम बैठक और सदस्य
प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक CCS में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने हिस्सा ले रहे हैं। इनके साथ ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर और जेपी नड्डा जैसे वरिष्ठ मंत्री भी वहां मौजूद हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत के आर्थिक हितों की रक्षा करना है।
CCS में सप्लाई चेन पर चर्चा
CCS बैठक में पीएनजी की उपलब्धता बढ़ाने और एलपीजी की सप्लाई को निर्बाध रूप से जारी रखने पर विशेष जोर दिया गया। युद्ध की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की भारी आशंका जताई जा रही है। सरकार चाहती है कि आम जनता को गैस और ऊर्जा की कमी का सामना किसी भी कीमत पर न करना पड़े।
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खाद और खेती की चिंता
ऊर्जा के साथ-साथ उर्वरक यानी खाद की उपलब्धता को लेकर भी CCS बैठक में आज बहुत ही व्यापक समीक्षा और मंथन हो रहा है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और अन्य मंत्रियों ने किसानों के लिए खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर अपनी बात रखेंगे। सरकार की पूरी कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारत की खेती और खाद्य सुरक्षा पर बिल्कुल न पड़े।
पुरानी बैठकों की समीक्षा
आज की इस महत्वपूर्ण चर्चा में 22 मार्च को हुई पिछली मीटिंग में लिए गए फैसलों की प्रगति की भी बारीकी से समीक्षा की होगी। मंत्रियों ने इस बात का आकलन किया कि पिछले कुछ दिनों में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का जमीन पर क्या असर हुआ है। पिछली रणनीतियों के आधार पर ही अब भविष्य के लिए नए और ठोस रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं।
युद्ध का वैश्विक असर
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को गहरी चिंता में डाल दिया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशियाई देशों पर निर्भर है, इसलिए यह बैठक बहुत ही सामयिक है। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर नजर रखने को कहा है।
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रणनीतिक मंथन और तैयारी
बैठक में हरदीप सिंह पुरी, पीयूष गोयल और अश्विनी वैष्णव जैसे मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों की तैयारियों का विस्तृत विवरण पेश कर रहे हैं। सरकार एक ऐसी मजबूत रणनीति तैयार कर रही है जिससे बाहरी संकट के बावजूद घरेलू बाजार में जरूरी वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहें। आपूर्ति श्रृंखला को टूटने से बचाने के लिए वैकल्पिक मार्गों और नए स्रोतों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
