अंधविश्वास को 'विज्ञान' बताना समाज के लिए खतरा, केरल के CM पिनराई विजयन ने प्रतिगामी परंपराओं पर साधा निशाना

CM Pinarayi Vijayan: मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अंधविश्वास को विज्ञान के रूप में पेश करने की कोशिशों को वैज्ञानिक चेतना और तर्कशील सोच के लिए खतरा बताया है।
अंधविश्वास को 'विज्ञान' बताना समाज के लिए खतरा: केरल के CM पिनराई विजयन ने प्रतिगामी परंपराओं पर साधा निशाना
CM पिनराई विजयन (फोटो- सोशल मीडिया)
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Pinarayi Vijayan Kerala Science Congress Speech: केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने समाज में वैज्ञानिक चेतना (Scientific Temper) को कमजोर करने के प्रयासों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। रविवार को 38वीं केरल विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि अंधविश्वास और प्रतिगामी परंपराओं को विज्ञान के चश्मे से पेश करना न केवल गलत है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक गंभीर खतरा भी है।

पौराणिक कथाओं और विज्ञान के बीच स्पष्ट अंतर की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि आजकल मिथकों और किंवदंतियों की अतार्किक कहानियों को 'प्राचीन वैज्ञानिक खोज' बताकर महिमामंडित करने का चलन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "समाज को अंधविश्वास और अवैज्ञानिक प्रथाओं को पुनर्जीवित करने के प्रयासों का सक्रिय रूप से विरोध करना चाहिए। गैर-तार्किक पौराणिक दावों को ऐतिहासिक आविष्कारों के रूप में पेश करने वाले विमर्शों को खुले तौर पर बेनकाब करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।" विजयन ने स्पष्ट किया कि प्रगतिशील समाज वही है जो मानवतावाद के पक्ष में मजबूती से खड़ा हो। उन्होंने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अपनी खोज और चर्चाओं का उपयोग समाज से इन प्रतिगामी प्रवृत्तियों को खत्म करने के लिए करें।

विज्ञान के वास्तविक इतिहास की समझ

पिनराई विजयन ने कहा कि केवल वैश्विक तकनीकी प्रगति की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है। समाज को यह समझना होगा कि विज्ञान किन परिस्थितियों में विकसित हुआ और कैसे इसने पीढ़ियों से मानव जीवन को बदला है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब विज्ञान के इतिहास को जानबूझकर अफवाहों और मिथकों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है, तो प्रमाण-आधारित और सही ऐतिहासिक समझ विकसित करना अनिवार्य हो जाता है।

भारत की प्रगति: 1947 से अब तक का सफर

इस अवसर पर इसरो (ISRO) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने भी संबोधित किया। उन्होंने भारत की विकास यात्रा का एक प्रभावशाली खाका प्रस्तुत किया। नारायणन ने याद दिलाया कि 1947 में आजादी के वक्त भारत किन चुनौतियों से जूझ रहा था।  1947 में औसत आयु मात्र 32 वर्ष थी, जो आज बढ़कर लगभग 70 वर्ष हो गई है। स्वतंत्रता के समय मृत्यु दर अत्यंत अधिक थी, जिसमें अब भारी कमी आई है। उस समय 80% आबादी गरीबी रेखा के नीचे थी। नारायणन ने कहा कि तकनीकी ढांचे और वैज्ञानिक प्रगति की बदौलत ही भारत आज दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में शामिल है और कई परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालित कर रहा है।

डॉ. टेसी थॉमस को 'केरल विज्ञान पुरस्कार'

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 का प्रतिष्ठित 'केरल विज्ञान पुरस्कार' विख्यात वैज्ञानिक डॉ. टेसी थॉमस को प्रदान किया। इसके साथ ही केरल राज्य युवा वैज्ञानिक पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार और विज्ञान साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले मीडियाकर्मियों को भी पुरस्कृत किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता केरल राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. के.पी. सुधीर ने की, जबकि उद्योग मंत्री पी. राजीव ने स्वागत भाषण दिया। इस विज्ञान कांग्रेस ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आधुनिक भारत की नींव केवल और केवल तर्कशील सोच और वैज्ञानिक प्रमाणों पर ही टिकी रह सकती है।

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