पवन खेड़ा ने खटखटाया गुवाहाटी हाईकोर्ट का दरवाजा, असम पुलिस की FIR ने बढ़ाई मुश्किलें; जानें पूरा मामला
Gauhati High Court: कांग्रेस के सीनियर लीडर और हिमंता सरमा की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाने वाले पवन खेड़ा ने असम पुलिस द्वारा दर्ज मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
- Written By: सजल रघुवंशी
पवन खेड़ा (सोर्स- सोशल मीडिया)
Pawan Khera Case Assam: कांग्रेस के सीनियर लीडर और हिमंता सरमा की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाने वाले पवन खेड़ा ने असम पुलिस द्वारा दर्ज मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जानकारी के अनुसार उनकी याचिका आज सुबह हाईकोर्ट के रजिस्टर में दाखिल की गई। जिसे जल्द ही सुनवाई के लिए बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।
इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत पर लगाए गए स्थगन आदेश को हटाने से इंकार कर दिया था और उनसे असम की अदालत में ही राहत मांगने का सुझाव दिया था।
असम पुलिस ने इन आरोपों में दर्ज किया केस
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ असम पुलिस ने मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोपों में एफआईआर दर्ज की है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत पर दर्ज किया गया। चार अप्रैल को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और उन्होंने विदेशों में अघोषित संपत्तियां रखी हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में छिपाया गया है।
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आरोपों को रिनिकी ने बताया निराधार
इन आरोपों को रिनिकी भुइयां सरमा ने पूरी तरह निराधार और एआई के जरिए गढ़ा हुआ बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश करार देते हुए गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद 7 अप्रैल को असम पुलिस की एक टीम दिल्ली स्थित पवन खेड़ा के आवास पर पहुंची लेकिन वे वहां मौजूद नहीं मिले।
तेलंगाना हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत
कानूनी कार्रवाई के तहत खेड़ा ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया। अदालत ने 10 अप्रैल को उन्हें एक सप्ताह की अंतरिम राहत दी, ताकि वे असम की अदालत में नियमित अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकें। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट गए जहां से उन्हें असम कोर्ट जानें का सुक्षाव दिया गया।
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कांग्रेस ने मामले को बताया राजनीतिक प्रतिशोध
कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है, जबकि असम सरकार का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में की जा रही है। इस विवाद ने राज्य की राजनीति को खासा गर्मा दिया है, विशेषकर हालिया विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में। अब सभी की नजर गुवाहाटी हाईकोर्ट में पवन खेड़ा की याचिका पर आने वाले फैसले पर टिकी हुई है।
