क्या मैं आतंकवादी हूं...? पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा, अग्रिम जमानत बढ़ाने से अदालत का इनकार

Pawan Khera: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत बढ़ाने से किया इनकार। कोर्ट ने कहा कि मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन हो और राहत के लिए निचली अदालत का रुख करें।
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पवन खेड़ा(Image- IANS)
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Supreme Courtc on Pawan Khera: असम के मुख्यमंत्री हिमंता सरमा की पत्नी को लेकर टिप्पणी करने के मामले में एफआईआर का सामना कर रहे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। पवन खेड़ा ने अदालत से उस आदेश को वापस लेने की मांग की है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने एक बार फिर उनकी अग्रिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया है।

इस फैसले के बाद उनकी गिरफ्तारी का खतरा बढ़ गया है, जिसके चलते उन्होंने राहत के लिए शीर्ष अदालत का रुख किया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच के समक्ष हुई।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका पर प्रारंभिक आपत्ति जताई। वहीं पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील Abhishek Manu Singhvi ने पक्ष रखा। सिंघवी ने दलील दी कि उनके मामले में “एक्स-पार्टी स्टे” दिया गया है और कुछ दस्तावेज गलती से दाखिल हो गए थे। इस पर अदालत ने दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए और कहा कि दाखिल कागजों में तेलंगाना का पता दर्शाया गया है।

हाई कोर्ट में सही दस्तावेज जमा कर दिया गया

इस पर सिंघवी ने स्पष्ट किया कि वह दस्तावेज सही नहीं था और बाद में हाई कोर्ट में सही दस्तावेज जमा कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि यह गलती से फाइल हुआ था और उस समय वह खुद इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थे।

आधार से जुड़ा पता गलत

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता Pawan Khera के मामले में तीखी बहस देखने को मिली। अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि ट्रांजिट बेल याचिका में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आधार से जुड़ा पता गलत था। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “आपने जाली और बनावटी दस्तावेज दाखिल किए हैं।” इस पर पवन खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील Abhishek Manu Singhvi ने जवाब दिया कि हाई कोर्ट में दस्तावेजों में सुधार कर दिया गया था और सही कागज जमा किए गए थे, जिसे जज ने रिकॉर्ड में भी लिया।

जाली दस्तावेज दाखिल किए गए

हालांकि, अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखी। कोर्ट ने कहा कि अगर जाली दस्तावेज दाखिल किए गए हैं, तो बाद में सुधार करने से स्थिति सामान्य नहीं हो जाती। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता का आचरण “फेयर” नहीं माना जा सकता।

सिंघवी ने कोर्ट से अनुरोध किया कि उन्हें सोमवार तक असम में याचिका दाखिल करने का समय दिया जाए और तब तक गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा, “क्या वह कोई बड़ा अपराधी है?”

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गलत दस्तावेज दाखिल करना छोटी गलती नहीं मानी जा सकती। गौरतलब है कि पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट से उस आदेश को वापस लेने की मांग की है, जिसमें तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली उनकी अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी गई थी।

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