Paper Leak Bill: क्या सुरक्षित होंगी प्रतियोगी परीक्षाएं? नए संशोधन बिल के ये 7 नियम बदल देंगे पूरी व्यवस्था!

Public Examinations Amendment Bill 2026: लोकसभा में 'लोक परीक्षा विधेयक में संशोधन पर चर्चा की जा रही है। इस बिल में कुछ बड़े बदलाव किए गए। अब यह सवाल उठता है कि क्या इससे पेपर लीक के मामले बंद होंगे?
paper leak bill 2026
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह (सौजन्य-IANS)
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Paper Leak Bill 2026: नीट पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों और युवाओं में आक्रोश का माहौल है। परीक्षा के पेपर लीक होने और छात्रों व युवा उम्मीदवारों पर इसके असर को लेकर फिर से चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी बीच, लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026' पर चर्चा शुरू हो चुकी है। आज पेपर लीक पर तीसरे दिन चर्चा की जाएगी।

यह प्रस्तावित कानून, परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग के जवाब में सरकार की व्यापक पहल का हिस्सा है। सरकार ने इस संशोधन को एक अहम सुधार के तौर पर पेश किया है, जिसका मकसद जवाबदेही बढ़ाना और प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर होने वाली गड़बड़ियों को रोकना है।

पेपर लीक विधेयक का उद्देश्य

इस बिल का मकसद 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024' में संशोधन करना है। इसके तहत जेल की सजा और आर्थिक जुर्माना बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही जांच और मुकदमों के लिए सख्त समय-सीमा तय की जाएगी।

विचार के लिए बिल पेश करते हुए, प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह कानून छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है। उन्होंने इस संशोधन को मौजूदा व्यवस्था को ज्यादा असरदार और सख्त बनाने की दिशा में एक कदम बताया।

2024 में लाया गया था पेपर लीक विधेयक

मूल 2024 कानून परीक्षा के पेपर लीक होने की कई घटनाओं के बाद बनाया गया था और उसी साल जून में लागू हुआ था। इसमें अपराधों की 15 श्रेणियां तय की गई थीं, जिनमें प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी लीक करना, नकली परीक्षा वेबसाइट चलाना और अनुचित तरीकों में मदद करना शामिल था। कानून में सभी अपराधों को संज्ञेय (बिना वारंट गिरफ्तारी), गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य माना गया था, जबकि उम्मीदवार खुद इसके दायरे से बाहर थे।

पेपर लीक विधेयक 2026 में किए गए संशोधन

  • प्रस्तावित संशोधन में शामिल होने के अलग-अलग स्तरों के हिसाब से जुर्माना बढ़ाया गया है।
  • अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के दोषी पाए जाने वाले लोगों को कम से कम पांच साल की जेल होगी। पहले यह तीन साल थी।
  • अधिकतम सजा 10 साल तक हो सकती है।
  • अधिकतम जुर्माना भी 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए कर दिया जाएगा।
  • परीक्षा आयोजित करने में शामिल सर्विस प्रोवाइडर्स पर पहले 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगता था, जिसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दिया जाएगा।
  • उन्हें चार साल के बजाय आठ साल तक सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से रोका जा सकता है।
  • परीक्षा में हेरफेर करने की संगठित कोशिशों के लिए, न्यूनतम सजा पांच साल से बढ़ाकर सात साल कर दी जाएगी और साथ ही 10 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया जाएगा।

कानूनी कार्यवाही के लिए समय सीमा तय

बिल में कानूनी कार्यवाही के लिए सख्त समय-सीमा भी तय की गई है। केंद्र सरकार द्वारा मामला भेजे जाने के दो महीने के भीतर जांच पूरी होनी चाहिए। इसमें फास्ट-ट्रैक अदालतों का प्रावधान है, जिसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए सेशन कोर्ट तय करने होंगे। चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे पूरे होने की उम्मीद है, जबकि हाई कोर्ट में अपील की सुनवाई दो जजों की बेंच द्वारा यथासंभव इसी समय-सीमा के भीतर की जाएगी।

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