पद्म पुरस्कारों की साख पर उठे सवाल! सियासी फायदे के लिए BJP दे रही सम्मान, कांग्रेस के बयान से सियासी पारा हाई

Padma Awards Controversy: भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई, जिस पर कांग्रेस नेता उदित राज ने पुरस्कारों की अहमियत पर सवाल उठाए।
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उदित राज
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Udit Raj News: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की, जिसमें भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इस पर कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अब पद्म पुरस्कारों की अहमियत काफी कम हो गई है।

आईएएनएस से बातचीत में उदित राज ने कहा, “क्या अब ये पुरस्कार उन लोगों को दिए जा रहे हैं जो संविधान विरोधी हैं और जिन्होंने चुनी हुई सरकारों को गिराने का काम किया है?” उन्होंने सवाल उठाया कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान ही यह चर्चा क्यों शुरू हो जाती है कि किसे भारत रत्न या अन्य बड़े पुरस्कार दिए जाएं। उनके मुताबिक, अब इन सम्मानों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे इनका महत्व घट गया है।

पद्म पुरस्कारों की साख पर सवाल

उन्होंने कहा कि 25 जनवरी की शाम जब पद्म पुरस्कारों की घोषणा हुई, उस समय भी इस पर सवाल उठ रहे थे। अब इन पुरस्कारों का वह सम्मान नहीं रह गया है जो पहले हुआ करता था। उदित राज ने आरोप लगाया कि भगत सिंह कोश्यारी को पुरस्कार देकर ऐसे व्यक्ति को सम्मानित किया गया है, जिन्होंने संविधान का उल्लंघन किया और एक सरकार को गिराने में भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि अगर संविधान विरोधी लोगों को सम्मान मिलेगा, तो इन पुरस्कारों की साख कैसे बचेगी। उनका आरोप था कि इनका उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ हासिल करना रह गया है। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि पद्म पुरस्कारों को लेकर कार्ति चिदंबरम ने जो टिप्पणी की है, वह पूरी तरह सही है। वहीं, पूर्व कांग्रेसी नेता शकील अहमद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उदित राज ने कहा कि आज देश में सबसे बड़ी चुनौती संविधान और लोकतंत्र को बचाने की है।

उदित राज ने और क्या कहा?

अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने भाजपा छोड़ी है, लेकिन हर कोई अपनी मर्जी से पार्टी नहीं छोड़ता। संघ नाराज था और नहीं चाहता था कि मैं चुनाव लड़ूं। मुझे प्रस्ताव दिया गया कि मैं लोकसभा चुनाव न लड़ूं, जिसके बाद मैंने भाजपा छोड़ने का फैसला किया।”

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का उदाहरण देते हुए उदित राज ने कहा कि जब वे राष्ट्रपति नहीं बने थे, तब 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें उम्मीदवार तक नहीं बनाया गया था। उन्होंने दावा किया कि 20 मई 2014 को जब वे सांसद बने, तो रामनाथ कोविंद स्वयं अपना बायोडाटा लेकर उनके पास आए थे और भाजपा में सिफारिश करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा, “जब वे राष्ट्रपति बन सकते थे, तो मैं भी बहुत कुछ बन सकता था। मुझे मंत्रालय का प्रस्ताव भी मिला था।”

शकील अहमद के पार्टी छोड़ने पर उदित राज ने कहा कि ऐसे समय में उन्हें कांग्रेस नहीं छोड़नी चाहिए थी। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन क्या सत्ता ही सब कुछ है? उन्होंने कहा कि शकील अहमद महासचिव रह चुके हैं, वरिष्ठ प्रवक्ता रहे हैं और दो मंत्रालयों में मंत्री भी रहे हैं। “इसके बाद और क्या चाहिए? मुझे लगता है कि उन्होंने पार्टी छोड़कर सही फैसला नहीं किया।”

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