गुप्त होता है परमाणु मिशन, फिर भी लीक होती है इन्फॉर्मेशन, कौन करता है निगरानी?
दुनिया के बाकी देशों को कैसे पता चलता है कि कौन सा देश परमाणु बम बना रहा है या उसके पास परमाणु बम बनाने की सामग्री है? अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं, तो आइए इनके जवाब विस्तार से जानते हैं।
- Written By: अभिषेक सिंह
संदर्भ चित्र (डिजाइन)
ईरान का परमाणु कार्यक्रम इजरायल के साथ युद्ध का कारण बना। इस युद्ध के चलते दोनों ही देशों में जमकर तबाही हुई। अब भले ही ईरान और इजरायल के बीच सीजफायर हो चुका है, लेकिन एक सवाल जो सबके जेहन में छूट गया वो यह कि आखिर दूसरे देश के परमाणु कार्यक्रम की जानकारी कैसे लीक होती है?
परमाणु हथियारों की भयावहता से हर कोई वाकिफ है। यही वजह है कि इजरायल नहीं चाहता कि ईरान के पास परमाणु बम हो। अगर ईरान एक बार परमाणु बम बनाने की क्षमता हासिल कर लेता है, तो पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में इजरायल ने फिलहाल जो दबदबा बनाकर रखा है वह लगभग खत्म हो जाएगा।
परमाणु बम बनाने पर प्रतिबंध क्यों?
अन्य प्रतिद्वंद्वी देश भी ऐसा ही चाहते हैं, कि कोई भी देश परमाणु शक्ति से संपन्न न हो पाए। इसीलिए हर एक देश के परमाणु कार्यक्रमों पर निगरानी रखी जाती है और जैसे ही पता चलता है कि अमुक देश परमाणु हथियार विकसित कर रहा है तो उसके ऊपर वैश्विक प्रतिबंध लगाकर रोक दिया जाता है।
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इन सब के बीच मन में जो सवाल उठता है कि दुनिया के बाकी देशों को कैसे पता चलता है कि कौन सा देश परमाणु बम बना रहा है या उसके पास परमाणु बम बनाने की सामग्री है? अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं, तो आइए इनके जवाब विस्तार से जानते हैं।
कैसे एक्सपोज होता है परमाणु कार्यक्रम
कौन सा देश परमाणु बम बना रहा है, इसका पता लगाने के कई तरीके हैं। इसमें सबसे पहला काम खुफिया एजेंसियों का होता है। हर देश में दूसरे देशों की खुफिया एजेंसियां काम करती हैं। इनका मुख्य काम यह पता लगाना होता है कि उस देश में क्या चल रहा है? हथियारों पर क्या नया शोध कार्य हो रहा है? उस देश में कौन से गुप्त मिशन चल रहे हैं?
परमाणु बम विस्फोट (सोर्स- सोशल मीडिया)
खुफिया एजेंसियों के एजेंट इसके बारे में डेटा इकट्ठा करते हैं। इसमें अगर परमाणु हथियारों से जुड़ी कोई जानकारी सामने आती है तो इसकी जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा की जाती है, ताकि उस देश के परमाणु मिशन को रोका जा सके।
सैटेलाइट से रखी जाती है निगरानी
खुफिया एजेंसियों के अलावा सैटेलाइट के ज़रिए भी इस पर नज़र रखी जाती है। इसका इस्तेमाल तस्वीरें लेने और परमाणु रिएक्टरों पर नज़र रखने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु संयंत्र पर हमला करने के बाद, उस जगह की सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें बम विस्फोट से बने गड्ढे दिखाई दे रहे हैं।
IAEA भी निभाती है अहम भूमिका
इसके अलावा, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका काम परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। 2011 में IAEA की रिपोर्ट में बताया गया था कि ईरान साल 2003 में ही परमाणु बम बनाने के करीब पहुंच चुका था। इसके बाद ईरान की यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों को निलंबित कर दिया गया।
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हालांकि, इन सबके बावजूद इस बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं है कि कौन सा देश परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है। उदाहरण के लिए, इज़राइल न तो कभी स्वीकार करता है कि उसके पास परमाणु बम है और न ही इससे इनकार करता है। इतने शोध के बावजूद सटीक जानकारी एकत्र नहीं की जा सकी।
