NALSAR छात्रों के विरोध पर CJI सूर्यकांत ने दिया समर्थन, जानें कहां से की कानून की पढ़ाई और कैसा रहा सफर

CJI Suryakant NALSAR Controversy: NALSAR छात्रों के विरोध पर CJI सूर्यकांत ने समर्थन जताया। जानें उनकी कानून की पढ़ाई, छात्र जीवन, वकालत और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने का पूरा सफर।
 CJI Suryakant NALSAR University Controversy
सीजेआई सूर्यकांत लॅा छात्र विवादसोर्स-सोशल मीडिया
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CJI Suryakant Education: हैदराबाद की नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी इन दिनों काफी चर्चा में है। दरअसल, कानून की पढ़ाई पूरी कर चुके कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के शामिल होने का विरोध किया और इस संबंध में उन्हें पत्र भी लिखा। मामला तूल पकड़ने पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने इस बैच के छात्रों की वकालत पर रोक लगाने की बात कही।

इस पर CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए छात्रों के विरोध और असहमति के अधिकार की बात कही। उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए बताया कि वह भी छात्र जीवन में विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। ऐसे में आइए जानते हैं भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहां से कानून की पढ़ाई की, उनका छात्र जीवन कैसा रहा और कैसे उन्होंने वकालत की दुनिया में कदम रखा।

NALSAR मामले में क्या बोले CJI सूर्यकांत ?

बता दें कि CJI सूर्यकांत ने नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (NALSAR) के कानून के छात्रों की तरफ से किए गए विरोध पर कहा, "अगर छात्र कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो बार काउंसिल (Bar Council) को इसमें रोक-टोक करने का कोई अधिकार नहीं होता है।

इसमें BCI का कोई लेना-देना नहीं है।हम छात्रों के साथ हैं, छात्रों ने मुझे एक लेटर लिखा है और ये मेरे और छात्रों के बीच की बात है।BCI बिना वजह सर्कुलर जारी करने वाला कौन होता है? जब मैं कॉलेज में था, तो मैं भी छात्र गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहता था।कभी-कभी भले ही वे गलत बात कह रहे हों, लेकिन अगर वे कानूनी रूप से अपनी आवाज उठा रहे हैं, तो उन्हें इसकी इजाजत दी जानी चाहिए."

जानिए इस कॉलेज से ली थी कानून की डिग्री

दसअसल सुप्रीम कोर्ट (SC) की अधिकारिक वेबसाइट के आधार पर CJI सूर्यकांत 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्में थे। जिसेक बाद उन्होंने वर्ष 1981 में गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, हिसार से ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की थी। वहीं वर्ष 1984 में सूर्यकांत ने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (रोहतक) से कानून की डिग्री (Bachelor of Laws) प्राप्त की। CJIसूर्यकांत ने हायर एजुकेशन की पढ़ाई रोहतक में रहकर पूरी की थी।

कहां से प्रारंभ हुई वकालत

उन्होंने साल 1984 में अपनी कानून की पढ़ाई को पूरी करने के बाद हिसार की जिला अदालत से वकालत शुरूआत की। जिसके बाद CJI सूर्यकांत साल 1985 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट चले गए। वहां 7 जुलाई 2000 को उन्हें हरियाणा का सबसे कम आयु का एडवोकेट जनरल (Advocate General) बनाया गया, इसके बाद मार्च 2001 में अधिकारिक तौर पर 'सीनियर एडवोकेट' (Senior Advocate) का पद दिया गया।

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बतौर जज करियर की शुरुआत

वकालत के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका में अपने करियर की शुरुआत साल 2004 में की। 9 जनवरी 2004 को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में स्थायी जज नियुक्त किया गया। इसके बाद 2007 से 2011 तक वह राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की गवर्निंग बॉडी के सदस्य भी रहे। न्यायिक जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। साल 2011 में उन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए एलएलएम (LLM) की डिग्री हासिल की। इस दौरान उन्होंने यूनिवर्सिटी में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

2018 में हिमाचल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने

इसके बाद 5 अक्टूबर 2018 को जस्टिस सूर्यकांत ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। उनका न्यायिक करियर आगे बढ़ता रहा और 24 मई 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया।

करीब छह साल तक सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर सेवाएं देने के बाद 24 नवंबर 2025 को उन्होंने भारत के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली।जस्टिस सूर्यकांत को संवैधानिक, सेवा और सिविल मामलों में विशेषज्ञता हासिल है।

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