यमुना में ‘विदेशी मछलियों’ का कहर! NGT सख्त, 5 राज्यों को संरक्षण योजना का अल्टीमेटम
NGT Order Yamuna Fish Conservation: यमुना में प्रदूषण के कारण कतला और रोहू जैसी मछलियों की संख्या घट गई है। एनजीटी ने सीआईएफआरआई की सिफारिशों को लागू करने का आदेश दिया है।
- Written By: स्नेहा मौर्या
यमुना में 'विदेशी मछलियों' का कब्जा (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
Local Fish Species Declining Yamuna: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने यमुना नदी की गिरती सेहत और उसमें रहने वाले जलीय जीवों, विशेषकर स्थानीय मछली प्रजातियों के अस्तित्व पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एनजीटी ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सरकारों को निर्देश दिया है कि वे यमुना में पाई जाने वाली मछलियों के संरक्षण के लिए केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य पालन अनुसंधान केंद्र (CIFRI) की सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से लागू करें।
सर्वेक्षण में चौंकाने वाले खुलासे
अधिकरण ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए यह सुनवाई की, जिसमें आईसीएआर-सीआईएफआरआई (ICAR-CIFRI), प्रयागराज द्वारा किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण का हवाला दिया गया था। इस सर्वेक्षण के अनुसार, यमुना में भारतीय मूल की प्रसिद्ध मछलियों जैसे कतला, रोहू, नयन, पब्दा, चीतल, टेंगरा और महाशीर की संख्या में भारी गिरावट आई है। इसके विपरीत, कॉमन कार्प, थाई मांगुर और तिलापिया जैसी आठ विदेशी प्रजातियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो स्थानीय जैव विविधता के लिए खतरा बन गई हैं।
प्रदूषण और विदेशी मछलियों का दोहरा वार
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने स्पष्ट किया कि भारतीय मछलियों की संख्या घटने का मुख्य कारण नदी का बढ़ता प्रदूषण है। पीठ ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को निर्देश दिया कि वे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के संचालन में तेजी लाएं। अधिकरण ने जोर दिया कि शोधित जल का मानक ऐसा होना चाहिए जो जलीय जीवों के पनपने के अनुकूल हो।
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मछली संरक्षण के लिए प्रमुख सिफारिशें
- अधिकरण ने स्थानीय सरकारों को सीआईएफआरआई की निम्नलिखित सिफारिशों पर अमल करने को कहा है:
- अवैध शिकार पर रोक: मछली पकड़ने के हानिकारक उपकरणों पर प्रतिबंध और प्रजनन काल के दौरान सख्त निगरानी।
- विदेशी प्रजातियों पर नियंत्रण: अनुष्ठानों के नाम पर विदेशी मछलियों को नदी में छोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध।
- सतत प्रवाह: नदी में पानी का निरंतर प्रवाह (Environmental Flow) बनाए रखना ताकि ऑक्सीजन का स्तर बना रहे।
- जागरूकता अभियान: स्थानीय समुदायों और मछुआरों के बीच जैव विविधता के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना।
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राज्यों को जवाबदेही का निर्देश
अधिकरण ने टिप्पणी की कि अब तक चलाए गए विभिन्न संरक्षण कार्यक्रमों के बावजूद जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम नहीं दिख रहे हैं। अतः, इन कार्यक्रमों का पुनर्मूल्यांकन करना अनिवार्य है। एनजीटी ने संबंधित राज्यों को सुझावों पर विचार करने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है, ताकि पारिस्थितिक संतुलन को फिर से बहाल किया जा सके।
