यमुना में 'विदेशी मछलियों' का कब्जा (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
Local Fish Species Declining Yamuna: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने यमुना नदी की गिरती सेहत और उसमें रहने वाले जलीय जीवों, विशेषकर स्थानीय मछली प्रजातियों के अस्तित्व पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एनजीटी ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सरकारों को निर्देश दिया है कि वे यमुना में पाई जाने वाली मछलियों के संरक्षण के लिए केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य पालन अनुसंधान केंद्र (CIFRI) की सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से लागू करें।
अधिकरण ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए यह सुनवाई की, जिसमें आईसीएआर-सीआईएफआरआई (ICAR-CIFRI), प्रयागराज द्वारा किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण का हवाला दिया गया था। इस सर्वेक्षण के अनुसार, यमुना में भारतीय मूल की प्रसिद्ध मछलियों जैसे कतला, रोहू, नयन, पब्दा, चीतल, टेंगरा और महाशीर की संख्या में भारी गिरावट आई है। इसके विपरीत, कॉमन कार्प, थाई मांगुर और तिलापिया जैसी आठ विदेशी प्रजातियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो स्थानीय जैव विविधता के लिए खतरा बन गई हैं।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने स्पष्ट किया कि भारतीय मछलियों की संख्या घटने का मुख्य कारण नदी का बढ़ता प्रदूषण है। पीठ ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को निर्देश दिया कि वे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के संचालन में तेजी लाएं। अधिकरण ने जोर दिया कि शोधित जल का मानक ऐसा होना चाहिए जो जलीय जीवों के पनपने के अनुकूल हो।
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अधिकरण ने टिप्पणी की कि अब तक चलाए गए विभिन्न संरक्षण कार्यक्रमों के बावजूद जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम नहीं दिख रहे हैं। अतः, इन कार्यक्रमों का पुनर्मूल्यांकन करना अनिवार्य है। एनजीटी ने संबंधित राज्यों को सुझावों पर विचार करने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है, ताकि पारिस्थितिक संतुलन को फिर से बहाल किया जा सके।