Explainer: NEET री-एग्जाम के लिए क्यों उतारनी पड़ रही है सेना? क्या टीचर की जगह जवान लेगें परीक्षा, कारण क्या?
NEET Re-Exam: NEET-UG पेपर लीक के बाद अब वायुसेना संभालेगी कमान। जानिए 21 जून को होने वाले री-एग्जाम में सेना की भूमिका और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर क्यों मचा है देशव्यापी बवाल।
- Written By: अक्षय साहू
NEET री-एग्जाम करने में NTA की मदद करेगी वायु सेना (AI जनरेटेड फोटो)
NEET Re-Exam Indian Air Force: भारत में इस समय शिक्षा व्यवस्था शिक्षा मंत्रालय दोनों ही गंभीर सवालों के घेरे में है। हाल ही में आयोजित कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी की घटनाओं ने देश की परीक्षा व्यावस्था को कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। लोगों में खासकर NEET-UG 2026 और CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर गुस्सा भर गया है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में नीट री-एग्जाम को लेकर एक अहम बैठक की। इस मीटिंग की खास बात ये थी कि इसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के घर पर आयोजित किया गया था। जिसमें रक्षा मंत्री के अलावा वायु सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। जिसके बाद ऐसे कयास लगाए जाने लगे कि नीट री-एग्जाम की निगरानी अब वायुसेना करेगी? आइए आपको बताते हैं कि नीट री-एग्जाम में वायु सेना की क्या भूमिका होगी? नीट परीक्षा में सेना क्यों लगानी पड़ी? और CBSE में बच्चों की आंसर शीट जांचने के लिए OSM प्रणाली कितनी सटीक है?
NEET एग्जाम के लिए सेना क्यों लगानी पड़ी?
इस सबकी शुरुआत 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के बाद हुई। इस परीक्षा में करीब 22.79 लाख छात्र शामिल हुए थे। लेकिन परीक्षा के कुछ ही दिनों बाद प्रश्नपत्र के सोशल मीडिया पर लीक होने की खबर सामने आई, जिसने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) परीक्षा को रद्द करते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। इसके बाद परीक्षा को रद्द कर 21 जून को री-एग्जाम करने का फैसला लिया गया।
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धर्मेंद्र प्रधान के साथ रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (सोर्स- सोशल मीडिया)
सरकार इस बार परीक्षा की सुरक्षा में कोई कमी नहीं रहने देना चाहती। इसके चलते सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। जैसे प्रश्नपत्रों की छपाई और प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक लाने का सारा जिम्मा भारतीय सेना और वायु सेना को सौंपा गया है। जबकि पहले यह काम मुख्यतः डाक विभाग करता था। हालांकि NTA के मुताबिक, सेना की भूमिका केवल लॉजिस्टिक्स और आपातकालीन सहायता तक सीमित रहेगी।
CBI जांच के खुलासे के बाद फैसला
यह फैसला CBI द्वारा मामले की जांच में सामने आए तथ्यों के बाद लिया गया है। CBI ने अपनी जांच में बताया कि, NTA से जुड़े कुछ विशेषज्ञ थे जिन्हें प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से प्रश्नपत्र से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों का एक “गेस पेपर” तैयार कर लाखों रुपये में बेचा और उसे डिजिटल माध्यमों के जरिए शेयर किया। यह दिखाता है कि समस्या केवल बाहरी गिरोहों तक सीमित नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली के अंदर तक पैठ बना चुकी है।
पेपर लीक से लाखों छात्र परेशान (सोर्स- सोशल मीडिया)
CBSE परीक्षा में मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर विवाद
NEET विवाद के साथ-साथ CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा के रीजल्ट को लेकर भी घमासान मचा हुआ है। CBSE में इस साल पास होने वाले छात्रों के प्रतिशत में भारी गिरावट आई। जिसके बाद बड़ी संख्यां में छात्रों ने आंसर शीट री-चेक के लिए आनेदन किया। जिसके बाद छात्रों ने पाया कि उसकी कॉपियां जांचने में भारी गलतियां हुई है। छात्रों और अभिभावकों ने इसके लिए CBSE के आंसर शीट चेकिंग सिस्टम ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) जिम्मेदार बताया। कई अभिभावकों ने तो इसके लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया और ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को ही बंद करने की मांग कर दी।
क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?
ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम CBSE ने पहली बार लागू किया है। इस में छात्रों के आंसर शीट को स्कैन कर डिजिटल तरीके से चेक किया जाता है। छात्रों का आरोप है कि कई आंसर शीट की स्कैनिंग साफ नहीं थी, जिससे परीक्षकों को जवाब पढ़ने में कठिनाई हुई और नंबर प्रभावित हुए। कुछ छात्रों ने तो आंसर शीटस की क्वालिटी और रिकॉर्ड की गई सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए।
सीबीएसई ने पहली बार लागू किया ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (AI जनरेटेड फोटो)
इसके अलावा CBSE ने इस पूरे काम की जिम्मेदारी एक प्राइवेट कंपनी को सौंपी थी। आलोचकों का कहना है कि मूल्यांकन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में तकनीकी खामियां और निजी एजेंसियों पर अत्यधिक निर्भरता छात्रों के हितों को नुकसान पहुंचा सकती है।
परीक्षओं में क्यों हो रही बार-बार गड़बड़ी?
विशेषज्ञों का मानना है कि, बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:
- पेपर लीक माफिया और भ्रष्ट तंत्र का गठजोड़: सामने आए कई मामलों में कोचिंग संस्थानों, बिचौलियों और परीक्षा एजेंसियों के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत थी। जब प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञ ही लीक में शामिल पाए जाएं, तो सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमजोरी साफ हो जाती है।
- निजी एजेंसियों पर बढ़ती निर्भरता: NTA अपेक्षाकृत सीमित स्थायी स्टाफ के साथ काम करती है और कई महत्वपूर्ण काम बाहरी कंपनियों द्वारा करवाए जाते हैं। प्रश्नपत्रों की छपाई, पैकिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और टेक्निकल ऑपरेशन में प्राइवेट कंपनियों के रोल बढ़ने से सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ जाता है। डिजिटल एन्क्रिप्शन, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और एडवांस सिक्योरिटी उपायों होने के बावजूद ये पूरी तरह से लागू नहीं हो पाए हैं।
- जवाबदेही की कमी: NTA एक संवैधानिक या वैधानिक संस्था नहीं है, बल्कि एक रजिस्टर्ड सोसाइटी के तौर पर काम करती है। इसके कारण इसके काम करने के तरीके पर सार्वजनिक निगरानी और जवाबदेही भी सीमित हैं। साथ ही पारदर्शिता की कमी से संस्थागत सुधारों की स्पीड को भी धीमा कर दिया है।
IIT-JEE और UPSC से क्या सीख सकते हैं?
NEET के मुकाबले IIT-JEE और UPSC की परीक्षाएं उम्मीद से अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं। IIT-JEE कई शिफ्टों में कंप्यूटर आधारित परीक्षा के रूप में आयोजित होता है, जिससे एक ही प्रश्नपत्र के लीक होने का जोखिम कम हो जाता है। इसके अलावा, प्रश्नपत्रों की कठिनाई और अलग-अलग शिफ्ट नकल या धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम कर देता है।
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वहीं, UPSC की परीक्षा प्रणाली में निजी एजेंसियों की भूमिका बेहद कम है। क्योंकि UPSC परीक्षा वैकल्पिक की जगह वर्णनात्मक है ऐसे में बड़े पैमाने पर नकल या पेपर लीक का फायदा उठा पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यही वजह है कि UPSC को देश की सबसे विश्वसनीय परीक्षा प्रणालियों में गिना जाता है।
