

Why is Nautapa so Dangerous: भारत में मई और जून के महीने हमेशा से ही भीषण गर्मी के रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में गर्मी का स्वरूप पहले से बेहद खतरनाक हो चुका है। इसी भीषण गर्मी के सबसे गर्म नौ दिनों को नौतपा कहा जाता है। इस साल नौतपा की शुरुआत 25 मई से हो गई, जो 2 जून तक चलेगी। हालांकि, नौतपा केवल विज्ञान पर आधारित नहीं है बल्कि इसे रिश्ता हिंदू धर्म में सदियों से देखने को मिलता आ रहा है। आइए आपको बताते हैं कि नौतपा क्या है और इसे लेकर हिंदू मान्यताएं क्या कहती हैं? नौतपा में तापमान अचानक इतना ज्यादा क्यों बढ़ जाता है? इससे बचने के लिए कौन-कौन से उपाय किए जाने चाहिए?
भारतीय परंपरा और ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब शुरुआती नौ दिनों में गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है। लोक मान्यताओं में माना जाता है कि इस समय सूरज की किरणें सबसे अधिक तीखी होती हैं, जिसके कारण उत्तर और मध्य भारत में अत्यधिक तापमान दर्ज किया जाता है। हालांकि, विज्ञान के मुताबिक, हर क्षेत्र में समान गर्मी होना जरूरी नहीं है, क्योंकि हर इलाके में मौसम को प्रभावित करने वाले कई स्थानीय कारक भी मौजूद होते हैं।
पिछले पांच सालों के तापमान रिकॉर्ड यह बताते हैं कि नौतपा के दौरान गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस समय सूर्य की सीधी किरणें उत्तर भारत के बड़े हिस्से पर पड़ती हैं। इसके अलावा, हवाएं सूखी और गर्म हों तो तापमान तेजी से ऊपर जाता है। कई बार बादल और बारिश नौतपा में राहत देते हैं, लेकिन जब मौसम पूरी तरह साफ रहता है, तब गर्मी खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है।
वैज्ञानिक के नजरिए से नौतपा एक पारंपरिक शब्द है, जबकि मौसम विज्ञान में इसे हीट वेव या सीवियर हीट वेव कहा जाता है। कहने का अर्थ यह है कि नाम भले ही अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों का मतलब एक ही है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब मैदानी क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और यह स्थिति लगातार दो दिन या उससे ज्यादा रहती तो इसे हीट वेव कहा जाता है। वहीं अगर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर पहुंच जाए, तो उसे गंभीर हीट वेव (सीवियर हीट वेव) माना जाता है।
भारत जैसे विशाल देश में हर जगह एक जैसी गर्मी नहीं पड़ती। इसके पीछे कई कारण होते हैं। पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) कभी कभी ठंडी हवाएं और बादल लेकर आते हैं, जिससे तापमान में अचानक गिरावट आ जाती है। समुद्री क्षेत्रों में समुद्र से आने वाली नमी और हवाएं गर्मी को कम करने में मदद करती हैं। कई बार धूल भरी आंधियां और हल्की बारिश भी लोगों को अस्थायी राहत देती हैं। दूसरी ओर अगर हवा सूखी और गर्म हो, तो तापमान तेजी से बढ़ता है और लू की स्थिति गंभीर हो जाती है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, इस दौरान लोगों को लगातार पानी पीते रहना चाहिए, भले ही प्यास महसूस न हो। शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने के लिए छाछ, ORS, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन करना चाहिए। हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनने चाहिए ताकि शरीर को हवा मिलती रहे। बाहर निकलते समय सिर को कपड़े, टोपी या छाते से ढकना जरूरी है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप सबसे तेज होती है, इसलिए इस दौरान बाहर निकलने से बचना चाहिए।