

Murli Manohar Joshi on Delhi Police Lathi Charge: दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने छात्रों, विशेषकर महिला प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी चिंताओं का समाधान सहानुभूति और दूरगामी सोच के साथ किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने संदेश में जोशी ने लिखा, "यह देखना अत्यंत पीड़ादायक है कि देश के विभिन्न भागों से आए युवा छात्र कई दिनों से नई दिल्ली की सड़कों पर एकत्रित हैं। उनकी चिंताएं और सरोकार वास्तविक हैं। इन्हें सहानुभूति तथा दूरगामी समाधान की दृष्टि से हल किया जाना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानकर बलपूर्वक निपटाना उचित नहीं होगा।
मुरली मनोहर जोशी ने विशेष रूप से महिला प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा, "मुझे यह देखकर अत्यंत पीड़ा हुई है कि महिलाओं और युवतियों पर निर्मम बल प्रयोग किया गया। ऐसे बल के उपयोग से भारतीय समाज का बड़ा हिस्सा विकसित भारत के लक्ष्य से बहुत दूर चला जाएगा।"
राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्र कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन का मुख्य मुद्दा NEET पेपर लीक है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल रहे। वह लगभग 25 दिनों तक अनशन पर रहे और बाद में चिकित्सकीय देखरेख के लिए पहले सफदरजंग अस्पताल तथा बाद में गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराए गए।
20 जुलाई को CJP द्वारा आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र दिल्ली की सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।
घटना में कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके बाद CJP ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उधर, केंद्र सरकार का कहना है कि वह आंदोलनकारी पक्ष से बातचीत के लिए तैयार है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में आंदोलन के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए कई बार प्रस्ताव भेजा गया है।