'यह देश सबका है' रायपुर में मोहन भागवत का बड़ा बयान; जातिवाद पर प्रहार और परिवार बचाने का 'मंत्र'

RSS चीफ मोहन भागवत ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन में एक बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह देश हम सबका है और यही भावना सामाजिक सामंजस्य की असली पहचान है।
'This country belongs to everyone': Mohan Bhagwat's big statement in Raipur; a strong attack on casteism and a 'mantra' for saving the family
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (फोटो- सोशल मीडिया)
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RSS Cheaf Mohan Bhagwat News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन में एक बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह देश हम सबका है और यही भावना सामाजिक सामंजस्य की असली पहचान है। भागवत ने जाति, भाषा और धन के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाज के लिए घातक बताया। उनका यह संबोधन न केवल एकजुटता की अपील थी, बल्कि समाज में फैली दूरियों को पाटने की एक गंभीर कोशिश भी नजर आई।

अपने तीन दिवसीय प्रवास के दौरान सोनपैरी गांव में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सद्भाव की शुरुआत खुद के मन से भेदभाव मिटाने से होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मंदिर, जलस्रोत और श्मशान घाट जैसे सार्वजनिक स्थान सभी के लिए समान रूप से खुले होने चाहिए। भागवत का मानना है कि सामाजिक सेवा टकराव का नहीं, बल्कि एकता का प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हम दूसरों को अपना मानेंगे, तभी सच्चा सामाजिक बदलाव आएगा और देश मजबूत बनेगा।

'मंगल संवाद' से बचेगा परिवार

मोहन भागवत ने ‘कुटुंब प्रबोधन’ पर जोर देते हुए परिवारों को बिखरने से बचाने का अनूठा सूत्र दिया। उन्होंने सलाह दी कि परिवार के सभी सदस्यों को सप्ताह में कम से कम एक दिन साथ बिताना चाहिए, प्रार्थना करनी चाहिए और घर का बना खाना साथ खाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अकेलापन इंसान को नशे और गलत आदतों की ओर धकेल देता है। घर में नियमित बातचीत, जिसे उन्होंने 'मंगल संवाद' कहा, इन बुराइयों को रोकने में मददगार साबित होगी। अगर देश सुरक्षित नहीं है, तो परिवार भी सुरक्षित नहीं रह सकते।

पर्यावरण और स्वदेशी की वकालत

आरएसएस प्रमुख ने ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण को लेकर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों से ही पानी बचाने, वर्षा जल संचयन और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक कम करने की शुरुआत करें। इसके अलावा, उन्होंने स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की बात कही। भागवत ने कहा कि जहां तक संभव हो, देश में बनी चीजें ही खरीदें। साथ ही, उन्होंने संविधान, कानून और नागरिक अनुशासन का सख्ती से पालन करने की नसीहत भी दी।

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