‘VB-G RAM G’ बिल पर संसद में भारी बवाल, शिवराज बोले- बापू के सपनों को साकार करने वाला
Lok Sabha में मोदी सरकार ने 20 साल पुराने मनरेगा कानून को बदलकर नया 'VB-G RAM G' विधेयक पेश कर दिया है। Shivraj Singh Chauhan ने जैसे ही सदन में यह बिल रखा पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
- Written By: सौरभ शर्मा
'जी-राम-जी' बिल संसद में भारी बवाल के बीच पेश (फोटो- सोशल मीडिया)
VB-G RAM G Bill Shivraj Singh Chouhan Present in Lok Sabha: लोकसभा में बुधवार का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा। मोदी सरकार ने 20 साल पुराने मनरेगा कानून को बदलकर नया ‘VB-G RAM G’ (विकसित भारत गारंटर फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) विधेयक पेश कर दिया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जैसे ही सदन में यह बिल रखा, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। शिवराज सिंह ने दावा किया कि यह नया कानून महात्मा गांधी के सपनों को सच करने वाला है, लेकिन विपक्ष ने इसे गांधी जी का अपमान बताकर भारी हंगामा किया।
इस विधेयक पर चर्चा के लिए सदन में छह घंटे का समय तय किया गया है। विपक्ष का सबसे बड़ा विरोध इस बात को लेकर है कि सरकार इस कानून से महात्मा गांधी का नाम हटा रही है। साथ ही, राज्यों पर 40 फीसदी खर्च का बोझ डालने का भी कड़ा विरोध किया जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार रोजगार गारंटी को खत्म करना चाहती है। वहीं, सरकार का तर्क है कि इससे भ्रष्टाचार रुकेगा और असली जरूरतमंदों को फायदा मिलेगा।
बापू बनाम रामजी की लड़ाई
संसद में यह लड़ाई अब ‘बापू बनाम रामजी’ के नाम पर आ गई है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज को हटाकर ‘जी राम जी’ कानून के जरिए धार्मिक राजनीति कर रही है। कांग्रेस की तरफ से सांसद जयप्रकाश, के. सुरेश, इमरान मसूद और तारिक अनवर समेत कई नेता सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि सरकार ‘जय श्रीराम’ के सहारे गांवों में रोजगार की गारंटी खत्म कर रही है। उधर, भाजपा ने भरोसा दिलाया है कि रोजगार के दिन बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत होगी।
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क्या बदलेगा पुराने कानून में?
मनरेगा यानी महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट 2005 दुनिया का सबसे बड़ा रोजगार गारंटी कार्यक्रम रहा है। इसका मकसद गांव के हर परिवार को साल में कम से कम 100 दिन काम की गारंटी देना था। अगर 15 दिन में काम नहीं मिले, तो बेरोजगारी भत्ता देने का नियम था। 2022-23 तक इसमें 15.4 करोड़ सक्रिय मजदूर थे। अब सरकार इसी ढांचे को बदलकर नया कानून ला रही है, जिसका दावा है कि यह संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करेगा और पुरानी कमियों को दूर करेगा।
