क्या आने वाला है ईंधन संकट? मोदी सरकार ने कंपनियों से 30 दिन का LPG भंडार रखने को कहा
Hormuz Supply Risk: सरकार तेल और गैस भंडारण को लेकर लगातार काम कर रही है। तेल कंपनियों से एलपीजी का न्यूनतम 30 दिन का भंडार रखने को कहा गया है और इस दिशा में तैयारी जारी है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
LPG Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। मौजूदा हालात को देखते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सरकारी तेल विपणन कंपनियों को कम से कम 30 दिनों का एलपीजी स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सरकार तेल और गैस भंडारण को लेकर लगातार काम कर रही है। तेल कंपनियों से एलपीजी का न्यूनतम 30 दिन का भंडार रखने को कहा गया है और इस दिशा में तैयारी जारी है। उन्होंने बताया कि एलपीजी की मांग पहले 80,000 मीट्रिक टन थी, जो अब घटकर 72,000 मीट्रिक टन रह गई है। वहीं भारतीय रिफाइनरियां फिलहाल 52,000 मीट्रिक टन एलपीजी का उत्पादन कर रही हैं।
कैसे बढ़ाया जा रहा उत्पादन?
एलपीजी उत्पादन को लेकर सुजाता शर्मा ने बताया कि यह काफी हद तक रिफाइनरियों में किए जाने वाले ऑप्टिमाइजेशन पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि C3 और C4 अणुओं के इस्तेमाल से भी उत्पादन संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। कुछ रिफाइनरियां दोबारा चालू हो चुकी हैं, जिससे सप्लाई में सुधार देखने को मिला है।
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इसके अलावा अलग-अलग रिफाइनरों द्वारा किए गए ऑप्टिमाइजेशन के कारण एलपीजी की उपलब्धता में भी इजाफा हुआ है। शर्मा के मुताबिक मौसमी बदलावों की वजह से एलपीजी की मांग प्रभावित होती है, जिससे खपत में उतार-चढ़ाव बना रहता है।
तेल कंपनियों को कितना हो रहा नुकसान?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर उठ रही चिंताओं पर जवाब देते हुए सुजाता शर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के कारण तेल कंपनियां फिलहाल रोजाना करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। पिछले दस दिनों में चौथी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया गया है। पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।
इस बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल इजाफा करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक रिफाइनर जिस औसत कीमत पर तेल आयात कर रहे हैं, वह मई में बढ़कर 106.83 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी में यह 69.01 डॉलर थी।
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सरकार ने राज्यों से ईंधन की जमाखोरी, कालाबाजारी, अवैध भंडारण और हेराफेरी रोकने के लिए विशेष प्रवर्तन दल गठित करने को कहा है। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
