कोर्ट में पेश होने के बाद क्या बोले-लालू-राबड़ी और तेजस्वी, ऐसा है आगे का प्लान; जानें सबकुछ
Lalu Yadav: लालू प्रसाद यादव पर UPA-1 सरकार में रेल मंत्री रहते हुए नौकरी के बदले जमीन लेने का आरोप लगने के बाद ये केस चर्चा में आया है। यह पूरा मामला साल 2004 से 2009 के बीच का बताया जा रहा है।
- Written By: मनोज आर्या
लालू, राबड़ी और तेजस्वी यादव, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Lalu Yadav: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें सोमवार को उस समय बढ़ गईं, जब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उनसे जुड़े लैंड फॉर जॉब स्कैम मामले में आरोप तय किए। सुबह करीब साढ़े दस बजे पूरा लालू परिवार के 3 लोग लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में पहुंचे।
लोगों ने बताया कि अदालत का माहौल गंभीर था और कार्यवाही शुरू होने के बाद तनाव महसूस किया गया। न्यायाधीश ने आरोप पढ़ना शुरू किया और कहा कि सीबीआई ने सबूतों की श्रृंखला पेश की है, जिसके आधार पर कोर्ट आरोप तय करने जा रहा है।
आरोप स्वीकार नहीं, मुकदमे का करेंगे सामना
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने फाइलें देखने के बाद आरोप पढ़ने शुरू किए। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद की जानकारी में घोटाले की साजिश रची गई। उन्होंने पद का दुरुपयोग किया। न्यायाधीश ने फिर लालू यादव से सीधा सवाल किया कि क्या आप आरोपों को स्वीकार करते हैं या नहीं? लालू प्रसाद ने हल्की आवाज में जवाब दिया कि आरोप स्वीकार नहीं करते हैं और मुकदमे का सामना करेंगे। उनके इस जवाब के बाद कोर्ट रूम में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया।
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राबड़ी और तेजस्वी ने भी आरोपों को बताया गलत
न्यायाधीश ने राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की ओर भी रुख किया। उन्होंने राबड़ी देवी से पूछा कि उन्हें कम दाम में जमीन मिली,और यही आरोप तेजस्वी पर भी है: “क्या आप आरोप स्वीकार करते हैं? इस पर लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव तीनों ने एक स्वर में कहा कि उन पर लगाए गए सभी आरोप गलत हैं। करीब 11 बजे कोर्ट में औपचारिक कार्यवाही पूरी हुई और लालू परिवार अदालत से बाहर निकल गया। इस दौरान कोर्ट परिसर में वकीलों की हलचल तेज रही।
लैंड फॉर जॉब केस क्या है?
लालू प्रसाद यादव पर UPA 1 सरकार में रेल मंत्री रहते हुए नौकरी के बदले जमीन लेने का आरोप लगने के बाद ये केस चर्चा में आया है। यह पूरा मामला साल 2004 से 2009 के बीच का बताया जा रहा है। मामले में आरोप है कि लालू ने रेलवे में ग्रुप डी की भर्ती में धांधली करके इस खेल को अंजाम दिया है। यहां लोगों को नौकरी देने के बदले में कीमती जमीनें लीं हैं।
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600 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट के अनुसार, लालू परिवार को 7 जगहों पर जमीन मिली है। इस मामले में लालू परिवार पर 600 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाकर मामला चलाया जा रहा है। इसीलिए CBI ने लालू और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज करके कार्रवाई शुरू की है।
