लालू यादव, फोटो- सोशल मीडिया 
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IRCTC घोटाला: ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे लालू यादव, 5 जनवरी को सुनवाई

IRCTC Scam: कथित रेलवे घोटाला मामले में RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप तय करने वाले आदेश को चुनौती दी है।

प्रतीक पाण्डेय

IRCTC Hotel Scam: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। IRCTC घोटाले में राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के फैसले को अब लालू यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इस महत्वपूर्ण याचिका पर 5 जनवरी को सुनवाई होगी।

कथित IRCTC घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। यह कदम राउज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें 13 अक्टूबर को स्पेशल जज विशाल गोगने ने लालू यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप तय किए थे। इसी मामले में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी पर भी आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। अब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की कोर्ट इस मामले की मेरिट पर सुनवाई करेगी।

क्या है पूरा मामला और CBI के आरोप?

सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब उन्होंने और उनके परिवार ने रेलवे के होटलों के ठेके देने के बदले रिश्वत के रूप में प्रमुख जमीनों और शेयरों का लाभ उठाया। विशेष रूप से, रांची और पुरी के दो IRCTC होटलों को एक हेरफेर की गई निविदा प्रक्रिया के जरिए 'सुजाता होटल' नामक कंपनी को पट्टे पर दिया गया था। इसके बदले में, करोड़ों रुपये की जमीन को उसके बाजार मूल्य से बहुत कम दाम पर लालू की पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव से जुड़ी एक कंपनी को हस्तांतरित कर दिया गया था।

निचली अदालत ने क्या कहा था?

निचली अदालत ने अपने 13 अक्टूबर के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि लालू यादव को पूरी प्रक्रिया की जानकारी थी और उन्होंने होटलों के ट्रांसफर को प्रभावित करने के लिए हस्तक्षेप किया। कोर्ट के अनुसार, निविदा प्रक्रिया में किए गए बदलावों से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। ट्रायल कोर्ट ने इस पूरी लेन-देन को प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी वाला बताया और इसे निजी भागीदारी के नाम पर 'क्रोनी कैपिटलिज्म' की संज्ञा दी थी। कोर्ट का मानना है कि इस स्तर पर आरोपियों को बरी नहीं किया जा सकता।

यादव परिवार का पक्ष वहीं दूसरी ओर, लालू यादव और उनके परिवार ने इन सभी जांचों और आरोपों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और यह पूरा मामला पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली हाई कोर्ट से लालू यादव को राहत मिलती है या नहीं।

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