टैटू पार्लर के लिए कर्नाटक बनाएगा सख्त नियम, स्वास्थ्य मंत्री ने सेफ्टी को लेकर जताई चिंता…केंद्र सरकार से भी अपील
भारत में परंपरिक टैटू अब एक फैशन बन गया है। युवाओं में इसका प्रचलन तेजी से बढ़ा है। लेकिन यह कई खतरनाक बीमारियों का जनक भी है। यही वजह है कि कर्नाटक सरकार टैटू पार्लर को लेकर सख्त नियम बनाने वाली है।
- Written By: Saurabh Pal
टैटू (फोटो- सोशल मीडिया)
बेंगलुरू: भारत में परंपरिक टैटू अब एक फैशन बन गया है। युवाओं में इसका प्रचलन तेजी से बढ़ा है। लेकिन यह कई खतरनाक बीमारियों का जनक भी है। इस समस्या पर चिंता जाहिर करते हुए कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने राज्य में टैटू पार्लरों के लिए सख्त नियम बनाना की योजना पर विचार कर रहे हैं, ताकि सुरक्षा सेफ्टी को सुनिश्चित किया जा सके। इसके लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग करेगी। जिससे टैटू प्रक्रिया के लिए उचित दिशा-निर्देश स्थापित किए जा सकें।
स्वास्थ्य मंत्री ने टैटू स्याही में मेटल्स को स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में खाद्य सुरक्षा विभाग ने टैटू की स्याही के नमूनों का टेस्ट किया, जिसमें 22 तरह के खतरनाक मटेरियल पाए गए। इनमें स्किन कैंसर, HIV, हेपेटाइटिस बी और सी और स्टैफिलोकोकस ऑरियस जैसे बैक्टीरिया भी पाए गए।
गौरतलब है कि टैटू से जुड़े संक्रमणों के कारण एड्स, कैंसर और स्किन से जुड़ी बीमारियों में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसमें खराब सफाई स्टैंडर्ड और टैटू प्रक्रिया में खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल पर चिंता जताई गई है। हालाकि सुरक्षा व सेफ्टी का महंगे पार्लरों में ध्यान रखा जाता है, लेकिन अधिकतम पार्लरों में सुरक्षा व सेफ्टी के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
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इससे पहले 28 फरवरी को कर्नाटक सरकार ने राज्य के सभी होटलों में इडली बनाने में प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाई है, क्योंकि स्वास्थ्य मंत्री ने खतरनाक रसायनों की मौजूदगी को पहचाना था। गुंडू राव के मुताबिक इडली बनाने में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक प्लास्टिक का इस्तेमाल गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए खाद्य पदार्थों को बनाने या रख रखाव में प्लास्टिक का उपयोग स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
प्लास्टिक के उपयोग से स्वास्थ्य जोखिम स्वास्थ्य मंत्री राव ने कहा, खाद्य एवं सुरक्षा विभाग के टेस्ट में इसकी पुष्टि हुई है और होटलों और रेस्तरां में इडली बनाने के लिए प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।
