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जन्मदिन विशेष: वो कांग्रेसी जिसने मध्य प्रदेश में BJP को कर दिया अजेय, PM मोदी ने दिया रिटर्न गिफ्ट

Jyotiraditya Scindia: देश की रॉयल फैमिली में शुमार ग्वालियर के सिंधिया परिवार का हमेशा से दबदबा रहा है। आज इसी परिवार के मुखिया और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं।

  • By अभिषेक सिंह
Updated On: Jan 01, 2026 | 05:54 AM

ज्योतिरादित्य सिंधिया (सोर्स- सोशल मीडिया)

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Jyotiraditya Scindia Birthday: कभी कांग्रेस के ‘युवा तुर्क’ और अब भारतीय जनता पार्टी की सियासत के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक बन चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए राजनैतिक दृष्टिकोण से पिछले दो साल बेहद महत्वपूर्ण और उपलब्धियों भरे रहे हैं।

अगर किसी राजघराने का मध्य प्रदेश की राजनीति और जनमानस पर सबसे ज्यादा प्रभाव रहा है, तो वह ग्वालियर का सिंधिया परिवार ही है। वर्तमान में इसी प्रतिष्ठित परिवार से आने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया इस वक्त मध्य प्रदेश के सबसे बड़े और प्रभावशाली राजनेताओं में से एक माने जाते हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने के बावजूद केंद्र की राजनीति में इनका रौब और रुतबा न केवल कायम है, बल्कि उसमें बढ़ोतरी ही हुई है।

समय के साथ बढ़ा ज्योतिरादित्य का रुतबा

माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म 1 जनवरी 1971 को मुंबई में हुआ था। उन्हें सियासत विरासत में मिली थी, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से अपनी अलग पहचान बनाई है। भारतीय राजनीति में सिंधिया परिवार उन चुनिंदा परिवारों में से एक है, जिसके पास राजशाही विरासत होने के साथ ही लोकतंत्र में भी रसूख और जनता का प्यार कायम है। सिंधिया चाहे कांग्रेस में रहे हों या फिर भाजपा में, उनका रुतबा हमेशा कायम रहने के साथ ही समय के साथ बढ़ता गया है।

कैसे सियासत में उतरे ज्योतिरादित्य?

पिता माधवराव सिंधिया की आकस्मिक मृत्यु के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस के जरिए सियासत में कदम रखा और एक लंबी पारी खेली। लेकिन साल 2020 में उन्होंने मध्य प्रदेश की सियासत में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन किया, जो प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। या यूं कहें कि उनके इस परिवर्तन ने ही मध्य प्रदेश में भाजपा को अब तक ‘अजेय’ बना दिया है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया परिवार (सोर्स- सोशल मीडिया)

ज्योतिरादित्य के निजी जीवन की बात करें तो उनके परिवार में उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे, एक बेटा महाआर्यमन सिंधिया और एक बेटी अनन्या राजे हैं। ज्योतिरादित्य की पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया वड़ोदरा के गायकवाड़ राजघराने की बेटी हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, सिंधिया के कई अहम राजनीतिक फैसलों में उनकी पत्नी का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। यहां यह भी जानना दिलचस्प है कि प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया दुनिया की 50 सबसे खूबसूरत महिलाओं की सूची में भी शामिल रह चुकी हैं, जो उनकी शख्सियत को और खास बनाता है।

ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस से बगावत क्यों की?

वर्ष 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की यादें अभी भी ताजा हैं। उस वक्त जब राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी, तब ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था। जनता और समर्थकों को उम्मीद थी कि कमान उनके हाथ में होगी, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने सिंधिया की जगह कमलनाथ को मुख्यमंत्री बना दिया। यहीं से सिंधिया और कमलनाथ के बीच तल्खी बढ़ने लगी। यह नाराजगी धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि आखिरकार 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कांग्रेस का दामन छोड़ दिया और 11 मार्च 2020 को भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।

2023 में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत

यह केवल एक नेता का दल बदलना नहीं था, बल्कि उनके साथ उनके समर्थक 22 विधायकों ने भी कांग्रेस छोड़ दी। इसके चलते कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद राज्य में फिर से भाजपा की सरकार बनी और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने। वहीं, बाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया मोदी सरकार की टीम का एक अहम और अटूट हिस्सा बन गए। साथ ही भाजपा ने उसके बाद 2023 में हुए चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज की।

यह भी पढ़ें: पुण्यतिथि विशेष: वह राजनेता जो 26 साल की उम्र में बना सांसद, अटल बिहारी वाजपेयी को भी दी शिकस्त

भाजपा में शामिल होने के बाद सिंधिया के लिए 7 जुलाई 2021 का दिन उनके करियर का एक और मील का पत्थर साबित हुआ। यह दिन उनके लिए सबसे खास रहा क्योंकि इसी दिन उन्हें मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिली। उन्हें नागरिक उड्डयन जैसे बेहद अहम और प्रतिष्ठित मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान सबसे खास बात यह रही कि यहां भी सिंधिया को एक तरह से विरासत ही मिली, क्योंकि उनके पिता माधवराव सिंधिया भी अपने समय में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मंत्री रह चुके थे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का सियासी सफर

एक नजर उनके अब तक के शानदार राजनीतिक सफर पर डालें तो पता चलता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया पहली बार साल 2002 में लोकसभा का उपचुनाव जीतकर सांसद बने थे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 2002, 2004, 2009 और 2014 तक लगातार 4 बार लोकसभा चुनाव जीतकर अपनी लोकप्रियता साबित की। यूपीए-2 सरकार में वे ऊर्जा राज्य मंत्री रहे और चौदहवीं लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक की भूमिका भी निभाई। 2018 के विधानसभा चुनाव में वे कांग्रेस प्रचार समिति के अध्यक्ष थे और पार्टी के महासचिव पद पर भी रहे। भाजपा में आने के बाद वे पहली बार राज्यसभा सांसद बने और 6 जुलाई को कैबिनेट मंत्री बनाए गए।

यह भी पढ़ें: जन्मदिन विशेष: पिता की मौत, कांग्रेस से बगावत और जेल का सफर, फिर भी CM बनने से नहीं रोक पाई कोई ताकत

वर्तमान में ज्योतिरादित्य सिंधिया केन्द्र की मोदी सरकार में टेलीकॉम मिनिस्टर के तौर पर मौजूद हैं। इसके साथ ही भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। भी वे मोदी टीम के अहम सदस्यों में से एक हैं, जिनके पास कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी है। उन्हें पीएम मोदी के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम का भी एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है।

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Published On: Jan 01, 2026 | 05:54 AM

Topics:  

  • Birthday Special
  • Indian Politics
  • Jyotiraditya Scindia

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