जस्टिस संजीव खन्ना 51वें CJI के रूप में आज लेंगे शपथ, जानें कैसे तय किया वकील से मुख्य न्यायाधीश बनने का सफर
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल रविवार को समाप्त होने के बाद आज यानी 11 नवंबर को न्यायमूर्ति संजीव खन्ना मुख्य न्यायाधीश की शपथ ग्रहण करेंगे। वह भारत के 51 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे।
- Written By: प्रीति शर्मा
जस्टिस संजीव खन्ना (सौ. सोशल मीडिया)
दिल्ली: मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल रविवार को समाप्त होने के बाद आज यानी 11 नवंबर को न्यायमूर्ति संजीव खन्ना मुख्य न्यायाधीश की शपथ ग्रहण करेंगे। वह भारत के 51 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे। सुबह करीब 10 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्हें शपथ दिलाई जाएगी। जस्टिस खन्ना ने जिला कोर्ट में वकील के तौर पर अपनी वकालत की शुरुआत की।
उन्हें जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था, इस दौरान वह कई ऐतिहासिक फैसले का हिस्सा रहे हैं। ईवीएम की पवित्रता, चुनावी बॉन्ड योजना को खत्म करना, अनुच्छेद 370 हटाना, दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत जैसे फैसले शामिल हैं।
कैसे तय किया वकील से सीजेआई का सफर
जस्टिस संजीव खन्ना का जन्म साल 1960 में 14 नवंबर को दिल्ली में हुआ। वह प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी स्कूलिंग की बात करें तो वह दिल्ली के मॉडर्न स्कूल, बाराखंबा रोड से पढ़े हैं। साल 1980 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के ही कैंपस लॉ सेंटर से कानून की डिग्री हासिल की। बता दें कि वह राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे हैं।
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साल 1983 में उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल में एक वकील के रूप में नामांकन करवाया और शुरुआत के दिनों में तीस हजारी परिसर में जिला कोर्ट में प्रैक्टिस की और फिर वह दिल्ली हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। उन्होंने कंपनी लॉ, लैंड लॉ, पर्यावरण लॉ, कमर्शियल लॉ, चिकित्सा लापरवाही जैसे क्षेत्रों के अलावा आयकर विभाग के वरिष्ठ वकील के रूप में भी काफी काम किया है।
उन्होंने साल 2004 में दिल्ली सरकार का स्थायी वकील नियुक्त किया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उन्होंने 2005 में पदोन्नति ली। जिसके अगले साल वह स्थायी न्यायाधीश बन गए। दिल्ली हाईकोर्ट में जज के रूप में उन्होंने कई अहम फैसले लिए। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को बरकरार रखने जैसा अहम फैसला भी दिया है।
