जगद्गुरु रामभद्राचार्य का 77वां जन्मोत्सव: जयपुर में उमड़ेगा संतों का सैलाब, 1000 किलो केक से मनेगा जश्न
Jagadguru Rambhadracharya Birthday: जयपुर में तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का 77वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस अवसर पर 77 नदियों के जल से महाभिषेक और विशाल शोभायात्रा का आयोजन होगा।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
जगद्गुरु रामभद्राचार्य, फोटो- सोशल मीडिया
Rambhadracharya 77th Birthday: राजस्थान की राजधानी जयपुर में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर आध्यात्मिक संगम होने जा रहा है। तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के 77वें जन्मोत्सव पर धीरेंद्र शास्त्री और बाबा रामदेव जैसे दिग्गज संत शिरकत करेंगे। इस दौरान 1000 किलो का केक काटकर और 77 नदियों के जल से अभिषेक कर विशेष उत्सव मनाया जाएगा।
जयपुर के सीकर रोड स्थित नींदड़ आवासीय योजना में चल रहे 1008 कुण्डीय हनुमान महायज्ञ के बीच 14 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य का 77वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर यज्ञ स्थल पर 1000 किलो लड्डुओं का केक काटा जाएगा। जन्मोत्सव की शुरुआत सुबह 11 बजे एक भव्य 2 किलोमीटर लंबी शोभायात्रा से होगी, जिसमें जगद्गुरु बग्गी पर सवार रहेंगे और हाथी-घोड़े इस यात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। इसके अलावा, देश की 77 पवित्र नदियों के जल से उनका महाभिषेक किया जाएगा, जो उनकी उम्र के 77 वर्षों का प्रतीक है।
राष्ट्रपति मुर्मू और दिग्गज हस्तियों का जमावड़ा
इस भव्य आयोजन में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे। आयोजन समिति के अनुसार, 16 जनवरी को महायज्ञ के समापन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी जयपुर पहुंचेंगी। संतों की फेहरिस्त में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, योग गुरु बाबा रामदेव और साध्वी ऋतंभरा जैसी प्रमुख हस्तियां इस आध्यात्मिक उत्सव का हिस्सा बनेंगी।
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गिरिधर मिश्र से जगद्गुरु बनने तक का असाधारण सफर
14 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर में जन्मे गिरिधर मिश्र (बचपन का नाम) ने मात्र दो महीने की उम्र में अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। संक्रमण के कारण दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और 22 भाषाओं पर महारत हासिल की। 1983 में दीक्षा पूर्ण होने के बाद वे रामभद्राचार्य के रूप में विख्यात हुए। वे वर्तमान में रामानंद संप्रदाय के चार जगद्गुरुओं में से एक हैं और उन्होंने चित्रकूट में तुलसीपीठ की स्थापना की है।
240 से अधिक किताबों के रचयिता
जगद्गुरु रामभद्राचार्य की विद्वत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे बिना ब्रेल लिपि के केवल सुनकर ज्ञान अर्जित करते हैं और अब तक 240 से अधिक पुस्तकें लिख चुके हैं। उन्हें वेद, उपनिषद और रामचरितमानस कंठस्थ हैं। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इदिरा गांधी ने उन्हें पांच गोल्ड मेडल दिए थे और आंखों के इलाज के लिए अमेरिका भेजने का प्रस्ताव भी दिया था, जिसे उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया कि वे केवल भगवान राम को देखना चाहते हैं।
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दिव्यांगों के लिए समर्पित विश्वविद्यालय
समाज सेवा के क्षेत्र में उनका सबसे बड़ा योगदान चित्रकूट में स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय है, जो दुनिया का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है जो विशेष रूप से दिव्यांग छात्रों के लिए है। उनके इन्ही अतुलनीय योगदानों के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2015 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया था। राम जन्मभूमि विवाद में भी उन्होंने भगवान राम के पक्ष में प्रमुख वैचारिक गवाही दी थी।
