सीजफायर पर भारत की सियासत भी खूब गरमाई, विपक्ष ने विशेष सत्र की मांग करते हुए कहा- जनता को भरोसे में लेने का समय
सीजफायर पर विपक्षी नेताओं ने सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है, ताकि भारतीय सेना की बहादुरी व वीर सैनिकों के शौर्य पर चर्चा हो सके।
- Written By: सौरभ शर्मा
विपक्ष ने मांगा विशेष सत्र (फोटो - सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव सीजफायर के बाद से लगातार नये मोड ले रहा है। वहीं इस पर देश के भीतर राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका की पहल पर हुए इस सीजफायर पर सभी विपक्षी नेताओं ने अपनी-अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है और प्रधानमंत्री से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि सरकार पहलगाम की आतंकी घटना से लेकर युद्धविराम तक की पूरी जानकारी देश के सामने लाई जाए, ताकि पूरे देश की ओर से एकजुट होकर सेना के पराक्रम को सलामी दी जा सके और आतंकवाद के खिलाफ सशक्त संदेश दिया जाए।
सीजफायर की घोषणा के बाद विपक्ष के तमाम नेताओं ने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए सरकार से पारदर्शिता की मांग की है। साथ ही उन्होंने भारतीय सेना की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा है कि यह वक्त सैनिकों के शौर्य को सम्मान देने और जनता को भरोसे में लेने का है।
विपक्ष के सभी नेताओं ने रखीं अपनी मांगें, बोले- देश को भरोसे में ले सरकार
विपक्ष के सभी नेताओं ने अपनी मांगें रखीं है उनका कहना है कि सरकार देश को भी भरोसे में ले। इस समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से लेकर आरजेडी नेता ने प्रधानमंत्री से संसद का विशेष सत्र बुलाने की अपील करते हुए कहा कि इस सत्र में पहलगाम हमले और सीजफायर जैसे अहम विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। उनका मानना है कि देश को संसद के माध्यम से एक सुर में जवाब देना चाहिए।
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प्रधानमंत्री जी से आग्रह है कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर पहलगाम की आतंकी घटना से लेकर सीजफायर तक तिथिवार और बिंदुवार जानकारी देते हुए देश को भरोसे में लें ताकि समस्त भारतवासी संसद के माध्यम से एक स्वर एक ध्वनि में भारतीय सेना के शौर्य, वीरता और पराक्रम को धन्यवाद देते हुए विभिन्न… — Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) May 10, 2025
अन्य नेताओं ने भी दी प्रतिक्रिया, सेना को बताया गौरव
विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी सेना की तारीफ करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया को यह दिखा दिया है कि वह हर परिस्थिति में एकजुट रहकर मुकाबला करने में सक्षम है। एक नेता ने कहा कि बंदूकें भले ही शांत हुई हों, लेकिन भारत की आवाज़ आज भी बुलंद है।
