अकुला क्लास परमाणु अटैक पनडुब्बी। इमेज-सोशल मीडिया
India and Russia Deal: अब रूस से भारत दूसरी अकुला क्लास परमाणु अटैक पनडुब्बी (SSN) लीज पर लेने के प्रस्ताव से पीछे हटता नजर आ रहा है। इसकी वजह INS चक्र-3 की डिलीवरी में लगातार हो रही देरी है। इससे ऐसे समझौते का ऑपरेशनल और ट्रेनिंग का फायदा काफी कम हो गया है। INS चक्र-3 के लिए लीज एग्रीमेंट 2019 में हुआ था। इसे 2025 तक भारत आने की उम्मीद थी, लेकिन रूस द्वारा इसकी डिलीवरी 2028 तक टलने के संकेत दिए जा रहे हैं।
idrw.org के मुताबिक यह सवाल उठ रहा कि दूसरी अकुला क्लास पनडुब्बी लीज पर लेने का कितना मतलब रह जाता है। INS चक्र-3 का मुख्य उद्देश्य नौसेना के क्रू को परमाणु पनडुब्बियों का संचालन, रिएक्टर मैनेजमेंट करना, पानी के नीचे लंबे समय मिशन चलाने का प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस देना है। इसे भारत की स्वदेशी परमाणु अटैक पनडुब्बियों के आने तक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में देखी जा रही थी, जिनकी तैनाती 2036-37 के आसपास मानी जा रही।
रक्षा मंत्रालय पहले ही प्रोजेक्ट-77 के तहत दो स्वदेशी SSN बनाने को मंजूरी दे चुका है। इन पनडुब्बियों का डिजाइन लगभग पूरा है। कोचीन में अगले दो से तीन साल में निर्माण शुरू होने की संभावना है। पहली स्वदेशी SSN के 2034 के आसपास सी ट्रायल पर जाने की उम्मीद है।
ऐसे हालात में दूसरी अकुला क्लास पनडुब्बी लीज पर लेने का रणनीतिक तर्क कमजोर पड़ रहा है। 2026 में भी कोई नया समझौता होता है तो वह पनडुब्बी 2033 से पहले भारत नहीं पहुंचेगी, तब तक भारत की अपनी पहली स्वदेशी SSN ट्रायल के बेहद करीब होगी। इससे अलावा लीज वाली पनडुब्बी का फायदा सीमित रह जाएगा।
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वैसे, अब भी ट्रेनिंग की जरूरत अहम बनी है। परमाणु पनडुब्बियों के लिए क्रू को काफी पहले से तैयार करना पड़ता है। योजना के तहत INS चक्र-3 का इस्तेमाल कई क्रू को ट्रेन करने के लिए किया जाएगा, ताकि स्वदेशी SSN के शामिल होते ही प्रशिक्षित टीमें उपलब्ध रहें। इससे आगे आने वाली दूसरी स्वदेशी SSN के लिए भी क्रू पहले से तैयार किया जा सकेगा। भारतीय योजनाकार अब खास नतीजे पर पहुंचते दिख रहे हैं। दूसरी अकुला क्लास पनडुब्बी समय पर नहीं आ पाएगी। उसकी लागत को सही ठहराना मुश्किल होगा, जिस कारण फोकस मौजूदा लीज वाली पनडुब्बी से अधिकतम ट्रेनिंग लेने और स्वदेशी SSN कार्यक्रम को तेज करने पर रहने की संभावना है।